सौसर के डूकरझेला गांव में बिजली विभाग का कहर, गरीब आदिवासियों पर पूरी बिजली काटी
सौसर तहसील के डूकरझेला गांव में बिजली विभाग ने 2000–7000 रुपये के बकाया बिल के कारण पूरे गांव की बिजली काट दी। ग्रामीण अंधेरे में डूब गए, खेतों में सिंचाई ठप हुई और बच्चों की 26 जनवरी की तैयारियां प्रभावित हुईं।
UNITED NEWS OF ASIA. रिन्टू खान, पांढुरना (सौसर) सौसर तहसील के डूकरझेला गांव में गरीब आदिवासियों पर बिजली विभाग की कार्रवाई ने स्थानीय जनता में आक्रोश पैदा कर दिया। केवल कुछ ग्रामीणों के 2000 से 7000 रुपये तक के बकाया बिल के कारण विभाग ने पूरे गांव की बिजली काट दी। इसके परिणामस्वरूप सैकड़ों लोगों का दैनिक जीवन बाधित हो गया।
गांव में बिजली कटौती से खेतों में सिंचाई ठप हो गई, मोबाइल चार्ज नहीं हो सके और संचार व्यवस्था बाधित हो गई। साथ ही, 26 जनवरी की तैयारी कर रहे स्कूल के बच्चों के कार्यक्रम प्रभावित हुए। ग्रामीणों ने बताया कि बिजली विभाग ने बिना पूर्व सूचना पूरे गांव की बिजली बंद कर दी, जिससे अंधेरा और असुविधा फैली।
स्थानीय शिक्षक राजेश बागड़े ने कहा, “कुछ हजार रुपये के लिए पूरे गांव को अंधेरे में डाल देना अत्याचार है। बड़े बकायेदारों से लाखों रुपये वसूलने में विभाग की हिम्मत नहीं होती, लेकिन गरीबों पर यह कार्रवाई की जाती है।”
पत्रकार रिंटू खान जब मौके पर पहुंचे, तो विभागीय अधिकारी जिम्मेदारी लेने से कतराते दिखे और कहा कि “हमें जानकारी नहीं है।” केवल मीडिया के दबाव के बाद बिजली बहाल की गई। ग्रामीण मतीराम धुर्वे ने कहा, “यह घटना हमें परेशान करने के लिए की गई प्रतीत होती है। विकास की बात सिर्फ किताबों और वादों में रह गई है।”
ग्रामीणों का सवाल है कि क्या यही है भाजपा सरकार का आदिवासी विकास? बड़े बकायेदारों पर कार्रवाई की जगह छोटे बकायेदारों और गरीबों को निशाना बनाना न केवल अन्याय है, बल्कि प्रशासनिक व्यवहार में पारदर्शिता की कमी को भी उजागर करता है।
स्थानीय लोगों ने अपील की कि प्रशासन ऐसे अत्याचार को रोकने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाए और गांववासियों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करे। अभी देखना यह है कि सरकार और बिजली विभाग इस अन्याय पर कोई ठोस कदम उठाते हैं या आदिवासियों के साथ यह अन्याय यूं ही जारी रहेगा।
सौसर से रिंटू खान की रिपोर्ट