गटर सफाई में तीन मजदूरों की मौत पर बवाल: श्रम विभाग पर लापरवाही के आरोप

रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में सीवरेज टैंक की सफाई के दौरान तीन मजदूरों की मौत के बाद श्रम विभाग और प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगे हैं। सुशील सन्नी अग्रवाल ने इसे सुरक्षा मानकों की अनदेखी बताया।

Mar 21, 2026 - 13:03
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गटर सफाई में तीन मजदूरों की मौत पर बवाल: श्रम विभाग पर लापरवाही के आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर | राजधानी स्थित रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में सीवरेज टैंक की सफाई के दौरान तीन सफाई कर्मचारियों की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर कर दिया है। इस घटना को लेकर प्रदेश में आक्रोश का माहौल है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग उठने लगी है।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सुशील सन्नी अग्रवाल ने इसे मात्र दुर्घटना नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि बिना किसी सुरक्षा उपकरण के मजदूरों को जहरीले गटर में उतारना मानव जीवन के साथ खिलवाड़ है।

जानकारी के अनुसार, अस्पताल परिसर में स्थित सीवरेज टैंक की सफाई के लिए तीन मजदूरों को उतारा गया था। आरोप है कि उन्हें ऑक्सीजन मास्क, लाइफ जैकेट या अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे। जहरीली गैस के कारण दम घुटने से तीनों मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के बाद प्रशासन और संबंधित ठेकेदार द्वारा मृतकों के परिजनों को 30-30 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इस कदम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या केवल मुआवजा देकर इतनी बड़ी लापरवाही को नजरअंदाज किया जा सकता है।

सुशील सन्नी अग्रवाल ने आरोप लगाया कि यह घटना किसी एक संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के कई औद्योगिक और निजी संस्थानों में श्रमिकों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में श्रम विभाग द्वारा सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने में गंभीर कमी देखी जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में सुरक्षा मानकों पर अधिक ध्यान दिया जाता था, जबकि वर्तमान में इस दिशा में लापरवाही बढ़ी है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

अग्रवाल ने सरकार से मांग की है कि प्रदेश के सभी कारखानों और संस्थानों में तत्काल ‘सेफ्टी ऑडिट’ अनिवार्य किया जाए। साथ ही, सीवरेज सफाई कार्यों में मशीनीकरण को पूरी तरह लागू किया जाए, ताकि भविष्य में मजदूरों को इस प्रकार जोखिम भरे कार्य में न उतरना पड़े।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकारी तंत्र द्वारा कार्यस्थलों का नियमित और औचक निरीक्षण किया जाए, जिससे सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

फिलहाल, इस घटना ने श्रमिक सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और औद्योगिक मानकों को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।