स्वस्थ बचपन की नींव: पोषण, परवरिश और जीवनशैली से सशक्त छत्तीसगढ़ की दिशा

छत्तीसगढ़ में बच्चों के समग्र विकास के लिए पोषण, जीवनशैली और जागरूकता पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित आहार, सक्रिय दिनचर्या और सही परवरिश से ही स्वस्थ और आत्मविश्वासी पीढ़ी का निर्माण संभव है।

Apr 21, 2026 - 15:31
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स्वस्थ बचपन की नींव: पोषण, परवरिश और जीवनशैली से सशक्त छत्तीसगढ़ की दिशा

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को लेकर एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है, जो केवल भोजन तक सीमित नहीं बल्कि जीवनशैली और परवरिश से भी जुड़ा हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार आज का बचपन तेजी से बदलती आदतों के बीच कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। बच्चों में बढ़ता मोटापा, कम होती शारीरिक गतिविधि और जंक फूड की बढ़ती आदतें गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं।

 

पोषण सलाहकार सुश्री नमिता पाण्डेय (यूनिसेफ) के अनुसार, बच्चों का स्वास्थ्य केवल उनके खाने पर निर्भर नहीं करता, बल्कि उनकी पूरी जीवनशैली पर आधारित होता है। लंबे समय तक मोबाइल और टीवी स्क्रीन के सामने बिताया जाने वाला समय, खेलकूद में कमी और असंतुलित आहार ने बच्चों में टाइप-2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा दिया है।

राज्य सरकार भी इस दिशा में सक्रिय प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े अभियान गांव-गांव तक पहुंचाए जा रहे हैं। वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में मातृ एवं शिशु पोषण को प्राथमिकता दे रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक आहार ही इस समस्या का सबसे प्रभावी समाधान हो सकता है। रागी, बाजरा, ज्वार और कोदो-कुटकी जैसे मिलेट्स न केवल पौष्टिक होते हैं, बल्कि बच्चों के लिए लंबे समय तक ऊर्जा का स्रोत भी बनते हैं। रागी इडली, बाजरे का उपमा और कोदो खिचड़ी जैसे व्यंजन स्वाद और स्वास्थ्य दोनों का संतुलन प्रदान करते हैं।

बच्चों के समग्र विकास में परिवार, स्कूल और समाज की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। जब माता-पिता संतुलित आहार पर ध्यान देते हैं, शिक्षक खेल और पढ़ाई को समान महत्व देते हैं और समाज बच्चों को सकारात्मक नजर से देखता है, तभी एक स्वस्थ और आत्मविश्वासी पीढ़ी तैयार होती है।

विशेष रूप से जीवन के पहले 1000 दिन—गर्भधारण से लेकर दो वर्ष की आयु तक—बच्चों के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसी अवधि में मस्तिष्क का तेजी से विकास होता है, इसलिए इस समय मां का पोषण और देखभाल बेहद जरूरी है।

“7 स्टार भोजन थाली” जैसी पहल संतुलित आहार को सरल तरीके से समझाने का एक प्रभावी मॉडल है, जिसमें प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, विटामिन और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों को शामिल किया जाता है। यह न केवल कुपोषण बल्कि एनीमिया जैसी समस्याओं से भी बचाव में मदद करता है।

कुल मिलाकर, स्वस्थ बचपन का निर्माण केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयासों से संभव है। यदि हम अपनी आदतों में बदलाव लाएं—जंक फूड से पारंपरिक भोजन की ओर, मोबाइल से खेल के मैदान की ओर—तो आने वाली पीढ़ी को एक बेहतर और स्वस्थ भविष्य दिया जा सकता है।