निजी स्कूल संघ के ‘सहयोग आंदोलन’ पर विवाद: सरकार के खिलाफ सख्ती की मांग तेज

छत्तीसगढ़ में निजी स्कूल प्रबंधन संघ द्वारा घोषित ‘सहयोग आंदोलन’ को लेकर विवाद गहरा गया है। जनसेवक विकास तिवारी ने इसे शासन के खिलाफ चुनौती बताते हुए कार्रवाई और ऑडिट की मांग की है।

Mar 21, 2026 - 12:49
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निजी स्कूल संघ के ‘सहयोग आंदोलन’ पर विवाद: सरकार के खिलाफ सख्ती की मांग तेज

UNITED NEWS OF ASIA. अम्रोतेश्वर सिंह, रायपुर | छत्तीसगढ़ में निजी स्कूल प्रबंधन से जुड़ा विवाद अब तेज होता जा रहा है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा घोषित ‘सहयोग आंदोलन’ को लेकर प्रदेश में बहस छिड़ गई है। इस आंदोलन के तहत निजी स्कूलों ने स्कूल शिक्षा विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी और नोडल प्राचार्यों के कार्यों में सहयोग न करने तथा विभागीय पत्राचार का जवाब नहीं देने की बात कही है।

इस मुद्दे पर जनसेवक विकास तिवारी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे शासन व्यवस्था और संवैधानिक प्रक्रियाओं के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का रुख प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती देने जैसा है और इससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

विकास तिवारी ने अपने बयान में यह भी कहा कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा प्रकरण क्रमांक WPC 4988/2025 में आरटीआई शुल्क वृद्धि को लेकर कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया गया है। ऐसे में इस मुद्दे को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ निजी स्कूल प्रबंधन इस मामले को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई संस्था आरटीई अधिनियम की धारा 18 के प्रावधानों का उल्लंघन करती है, तो संबंधित स्कूलों की मान्यता रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकरण द्वारा ही लिया जा सकता है।

इसके अलावा, बिलासपुर स्थित एक स्कूल प्रबंधन से जुड़े मामले का भी उल्लेख करते हुए तिवारी ने कहा कि कुछ अभिभावकों द्वारा शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, जिनकी जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

विकास तिवारी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग की है कि निजी स्कूलों के पिछले 15 वर्षों के आय-व्यय का महालेखाकार के माध्यम से ऑडिट कराया जाए। उनका कहना है कि इससे वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आ सकेगी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध हो सकती है, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों द्वारा तथ्यों की पुष्टि आवश्यक होगी।

फिलहाल यह मुद्दा शिक्षा जगत और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले समय में सरकार, शिक्षा विभाग और संबंधित संगठनों के बीच संवाद या कार्रवाई इस विवाद की दिशा तय करेगी।