सांसद फूलोदेवी नेताम ने संसद में उठाया रायपुर एम्स में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा

फूलोदेवी नेताम ने संसद में एम्स रायपुर में डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने रिक्त पदों को भरने और सुविधाएं बढ़ाने की मांग की।

Mar 25, 2026 - 12:21
 0  5
सांसद फूलोदेवी नेताम ने संसद में उठाया रायपुर एम्स में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा

UNITED NEWS OF ASIA. रामकुमार भारद्वाज, फरसगांव। छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक अहम मुद्दा संसद में उठाया गया है। राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम ने मंगलवार को शून्यकाल के दौरान एम्स रायपुर में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी को लेकर चिंता जताई।

सांसद ने कहा कि रायपुर स्थित एम्स प्रदेश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थानों में से एक है, जहां छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग सहित दो दर्जन से अधिक जिलों के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। बावजूद इसके, अस्पताल में संसाधनों और स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को समय पर और पर्याप्त इलाज नहीं मिल पा रहा है।

उन्होंने सदन में कहा कि यदि किसी मरीज को समय पर इलाज नहीं मिलता, तो यह इलाज न मिलने के बराबर है। यही स्थिति वर्तमान में एम्स रायपुर की बन चुकी है, जहां गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।

सांसद फूलोदेवी नेताम ने आंकड़ों के साथ स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि एम्स रायपुर में चिकित्सकों के कुल 305 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 190 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इस प्रकार 115 पद खाली पड़े हुए हैं, जो स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि सबसे अधिक कमी कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और सर्जरी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

केवल डॉक्टर ही नहीं, बल्कि नर्सिंग, तकनीकी और प्रशासनिक स्टाफ की स्थिति भी चिंताजनक है। कुल 3,884 स्वीकृत पदों में से मात्र 2,387 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 1,497 पद अभी भी रिक्त हैं।

सांसद ने केंद्र सरकार से मांग की कि इन सभी रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए और अस्पताल में बिस्तरों की संख्या भी बढ़ाई जाए, ताकि मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सके।

उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे बड़े राज्य में एक प्रमुख संस्थान के रूप में एम्स रायपुर पर अत्यधिक दबाव है, इसलिए यहां सुविधाओं का विस्तार बेहद जरूरी है।

स्थानीय स्तर पर भी इस मुद्दे को गंभीरता से देखा जा रहा है। बस्तर और अन्य दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को उम्मीद रहती है कि उन्हें एम्स में बेहतर इलाज मिलेगा, लेकिन मौजूदा स्थिति उनके लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

इस मुद्दे के संसद में उठने के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि केंद्र सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी और प्रदेश के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।