यह कार्रवाई नेपानगर क्षेत्र में लंबे समय से हो रही ट्रांसफार्मर चोरी की घटनाओं को देखते हुए की गई। पुलिस के अनुसार आरोपी दिन में मोटरसाइकिल से खेतों में लगे ट्रांसफार्मरों की रेकी करते थे और रात के समय अपने साथियों के साथ मिलकर चोरी की वारदात को अंजाम देते थे।
पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पाटीदार, बुरहानपुर द्वारा लगातार ट्रांसफार्मर चोरी से किसानों की सिंचाई व्यवस्था बाधित होने को गंभीरता से लेते हुए सभी थाना प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए गए थे। उन्हीं निर्देशों के तहत यह कार्रवाई की गई।
पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंतर सिंह कनेश एवं अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) नेपानगर निर्भयसिंह अलावा के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी निरीक्षक ज्ञानु के नेतृत्व में टीम गठित कर आरोपियों की तलाश की जा रही थी।
ऐसे पकड़े गए आरोपी दिनांक 9 फरवरी 2026 को रात्रि गश्त के दौरान संदिग्ध रूप से जा रहे दो युवकों को स्कूटी से भागते हुए पकड़ा गया। पूछताछ में उन्होंने अपने नाम अकरम पिता असलम खान, निवासी सावदा जिला जलगांव तथा सरीफ पिता नसीर तडवी पठान बताए। सख्ती से पूछताछ करने पर दोनों ने ट्रांसफार्मर से क्वाईल चोरी करने वाले गिरोह के अन्य सदस्यों के नाम उजागर किए। इसके बाद पुलिस ने कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
जिले में दर्जनों घटनाओं को दिया अंजाम आरोपियों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने पिछले दो वर्षों में निंबोला, शाहपुर, शिकारपुरा तथा नेपानगर क्षेत्र में कुल 55 से अधिक ट्रांसफार्मरों से क्वाईल चोरी की वारदातों को अंजाम दिया है। केवल नेपानगर क्षेत्र में ही 7 ट्रांसफार्मर चोरी किए गए थे।
थाना नेपानगर क्षेत्र की प्रमुख घटनाएं
थाना नेपानगर में वर्ष 2025 में ग्राम सीवल, साईखेड़ा एवं पलासुर में तीन ट्रांसफार्मरों से क्वाईल चोरी की गई थी, जिसकी कीमत लगभग 70 हजार रुपये थी। इसी तरह 14 दिसंबर 2025 को ग्राम बड़ीखेड़ा में एक ट्रांसफार्मर से 15 हजार रुपये की क्वाईल चोरी हुई थी।
31 जनवरी 2026 को ग्राम सीवल में पेट्रोल पंप के सामने स्थित खेत से दो ट्रांसफार्मरों से करीब 80 हजार रुपये की तांबे की क्वाईल चोरी की गई थी, जबकि 10 फरवरी 2026 को एक अन्य किसान के खेत से 40 हजार रुपये मूल्य की क्वाईल चोरी की गई थी। इन सभी मामलों में बीएनएस की धारा 303(2) के तहत अपराध दर्ज किए गए थे।
किसानों को भारी नुकसान
जिले में वर्ष 2024 से 2026 के बीच कुल 68 ट्रांसफार्मर चोरी के मामले सामने आए हैं। एक ट्रांसफार्मर लगाने में शासन एवं किसानों को लगभग ढाई लाख रुपये प्रति डीपी का खर्च आता है। इन घटनाओं से शासन को करीब 1 करोड़ 70 लाख रुपये का नुकसान हुआ है, वहीं खेतों में सिंचाई बाधित होने से किसानों की फसलें भी प्रभावित हुई हैं।
फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और खरीदारों की जानकारी जुटा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ट्रांसफार्मर चोरी करने वाले नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।