मनेंद्रगढ़ शर्मसार: क्या कलेक्टर की ‘जुबान’ की कोई कीमत नहीं? 14 साल से इंसाफ को तरसती साध्वी, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

मनेंद्रगढ़ में एक साध्वी को 14 वर्षों से न्याय का इंतजार है। वर्ष 2010 में एसडीएम कोर्ट से पक्ष में आदेश मिलने के बावजूद आज तक अमल नहीं हुआ। महाशिवरात्रि तक मंदिर में पूजा का अधिकार दिलाने का कलेक्टर का वादा भी पूरा नहीं हुआ। अब प्रशासन पर प्रभावशाली लोगों को संरक्षण देने और कोर्ट आदेश की अवहेलना के आरोप लग रहे हैं।

Feb 19, 2026 - 17:23
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मनेंद्रगढ़ शर्मसार: क्या कलेक्टर की ‘जुबान’ की कोई कीमत नहीं? 14 साल से इंसाफ को तरसती साध्वी, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

UNITED NEWS OF ASIA . प्रदीप पटाकर,कोरिया | नेंद्रगढ़जिले में एक बार फिर प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक साध्वी को अपने संवैधानिक अधिकार के लिए पिछले 14 वर्षों से संघर्ष करना पड़ रहा है, लेकिन आज तक उसे न्याय नहीं मिल सका है। मामला सिद्ध बाबा घाटी स्थित हनुमान मंदिर, सिद्ध बाबा घाटी से जुड़ा हुआ है, जहां पूजा-पाठ को लेकर वर्षों से विवाद चला आ रहा है।

आरोप है कि प्रभावशाली लोगों द्वारा फर्जी समिति बनाकर मंदिर पर अवैध कब्जे जैसा हालात बना दिए गए हैं। इन्हीं दस्तावेजों के सहारे साध्वी को मंदिर में प्रवेश और पूजा से रोका जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल उस समय खड़ा हुआ, जब जिले के कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने सार्वजनिक रूप से यह भरोसा दिलाया था कि महाशिवरात्रि (15 फरवरी) तक साध्वी को मंदिर में पूजा-पाठ का अधिकार दिला दिया जाएगा। लेकिन तय तारीख गुजर जाने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जिले का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी स्वयं आश्वासन देकर उसे पूरा नहीं करता, तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद आखिर किससे करे।

यह मामला इसलिए भी बेहद गंभीर है, क्योंकि वर्ष 2010 में ही एसडीएम कोर्ट मनेंद्रगढ़ द्वारा साध्वी के पक्ष में आदेश पारित किया जा चुका है। इसके बावजूद 14 साल तक आदेश को लागू न किया जाना न्यायिक प्रक्रिया की खुली अवहेलना माना जा रहा है।

कानूनी जानकारों के अनुसार, किसी सक्षम न्यायालय के आदेश को जानबूझकर लागू न करना न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि यह न्यायालय की अवमानना के दायरे में भी आता है। इसके बावजूद अब तक न तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है और न ही उन लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है, जिन पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर मंदिर से जुड़े अधिकारों में हेरफेर करने के आरोप हैं।

शहर में यह चर्चा आम हो चुकी है कि प्रभावशाली और रसूखदार लोगों के दबाव में प्रशासन निष्क्रिय बना हुआ है। वहीं, साध्वी लगातार अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं और खुद को अपमानित और मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रही हैं।

हैरानी की बात यह भी है कि इस पूरे मामले में अब तक न तो किसी जनप्रतिनिधि ने खुलकर आवाज उठाई है और न ही सामाजिक संगठनों की ओर से कोई ठोस पहल दिखाई दे रही है। एक महिला साध्वी की लड़ाई अब केवल मंदिर तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रशासनिक संवेदनशीलता और कानून के सम्मान की परीक्षा बन चुकी है।

अब प्रशासन के सामने सीधे और स्पष्ट सवाल खड़े हैं—

  • कलेक्टर के वादे के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

  • एसडीएम कोर्ट के आदेश को लागू न करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?

  • फर्जी समिति बनाकर विवाद खड़ा करने वाले कथित ‘दबंगों’ पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजने की प्रक्रिया कब शुरू होगी?

मनेंद्रगढ़ की जनता अब इन सवालों के जवाब का इंतजार कर रही है।