बिछिया टोला में 'सफेदपोशों' का काला खेल: रेत की आड़ में निगल गए विकास का ₹62 लाख!

मनेन्द्रगढ़ के बिछिया टोला ग्राम पंचायत में रेत कार्य की आड़ में ₹62.84 लाख के कथित घोटाले का खुलासा हुआ है। उप-सरपंच पर डबल एग्रीमेंट कर पंचायत राशि के दुरुपयोग, कमीशनखोरी और दबाव की राजनीति के गंभीर आरोप लगे हैं।

Feb 5, 2026 - 13:23
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बिछिया टोला में 'सफेदपोशों' का काला खेल: रेत की आड़ में निगल गए विकास का ₹62 लाख!

UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर, MCB। ​मनेन्द्रगढ़ (MCB): जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो विकास की उम्मीदें दम तोड़ देती हैं। ग्राम पंचायत बिछिया टोला में भ्रष्टाचार का एक ऐसा वीभत्स चेहरा सामने आया है, जिसने लोकतंत्र की जड़ों को हिला कर रख दिया है। यहाँ पंचायत की तिजोरी पर डाका डालने के लिए 'डबल एग्रीमेंट' का जो मकड़जाल बुना गया, उसका खुलासा होते ही सत्ता के गलियारों में हड़कंप मच गया है।

​विकास की कब्र पर 'कमीशन' का महल।

​हैरानी की बात है कि जिस ₹62.84 लाख की भारी-भरकम राशि से बिछिया टोला की सूरत बदल सकती थी, सड़कों का कायाकल्प हो सकता था और गरीबों के घर रौशन हो सकते थे, उस पैसे को पंचायत के 'रिश्वतखोर गिद्धों' ने अपनी निजी तिजोरियां भरने के लिए नोच लिया। यह महज भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि जनता के भरोसे का कत्ल है।

​साजिश का 'मास्टरमाइंड' और रबर स्टैंप सरपंच!

​सूत्रों का दावा है कि इस पूरे महा-घोटाले का सूत्रधार उप-सरपंच ऋषभ तिवारी है, जिसने आदिवासी सरपंच की सरलता को अपनी ढाल बनाया। नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए, पुराने वैध अनुबंध को कुचलकर एक 'गुप्त समझौता' किया गया। आरोप है कि ₹31.50 लाख का 'रक्त-बीज'(एडवांस) तो पहले ही डकारा जा चुका है, और बाकी के लिए सौदेबाजी जारी थी।

​कलम पर पहरा बिठाने की नाकाम कोशिश
​जब पाप का घड़ा भरा और मामला सार्वजनिक हुआ, तो बौखलाए उप-सरपंच ने अपनी सत्ता की हनक दिखानी शुरू कर दी है। सच लिखने वाले पत्रकारों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले शिकायतकर्ताओं को जेल भेजने और FIR कराने की धमकियां दी जा रही हैं। यह सीधे तौर पर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का गला घोंटने की साजिश है।

​इन 'चेहरों' पर टिकी है जांच की सुई:

​ऋषभ तिवारी (उप-सरपंच): मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप।

​सोनकुंवर (सरपंच): पद के दुरुपयोग और मिलीभगत का आरोप।

​उमेश जायसवाल (पंच पति): अपात्र होने के बावजूद बंदरबाँट में शामिल होने का आरोप।

​मकसूद आलम: निजी स्वार्थ के लिए सरकारी संपत्ति के दोहन में मददगार।


​चेतावनी टीप: प्रशासन की चुप्पी अब जनता को खटक रही है। अगर इन 'रेत माफियाओं' और 'कागजी लुटेरों' पर तत्काल नकेल नहीं कसी गई, तो बिछिया टोला की जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।