सिद्ध बाबा मंदिर में आस्था के नाम पर अंधेरगर्दी का आरोप, करोड़ों के चढ़ावे में घोटाले और महिला साध्वी उत्पीड़न का मामला उजागर

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के प्रसिद्ध सिद्ध बाबा मंदिर में करोड़ों रुपये के चढ़ावे में अनियमितता, मंदिर प्रबंधन पर कब्जे के आरोप और एक महिला साध्वी के उत्पीड़न का मामला सामने आया है। शिकायत कलेक्टर व एसपी तक पहुंच चुकी है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से सवाल खड़े हो रहे हैं।

Jan 9, 2026 - 17:36
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सिद्ध बाबा मंदिर में आस्था के नाम पर अंधेरगर्दी का आरोप, करोड़ों के चढ़ावे में घोटाले और महिला साध्वी उत्पीड़न का मामला उजागर

UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर, कोरिया | मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) | छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध  सिद्ध बाबा मंदिर में इन दिनों भक्ति और श्रद्धा के बजाय विवाद और आरोपों की गूंज सुनाई दे रही है। आगामी 14 जनवरी से शुरू होने वाले वार्षिक मेले से ठीक पहले मंदिर प्रबंधन पर करोड़ों रुपये के चढ़ावे में गड़बड़ी और एक महिला साध्वी के उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिससे जिला प्रशासन में भी हड़कंप मच गया है।

एनएच-43 के किनारे स्थित सिद्ध बाबा मंदिर में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और मेले से होने वाली आय करोड़ों रुपये तक बताई जाती है। आरोप है कि इस आय का न तो कोई पारदर्शी लेखा-जोखा है और न ही इसका उपयोग सार्वजनिक हित में हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर और मेले की आय का बड़ा हिस्सा ‘नरहरि दास सेवा समिति’ और ‘संकट मोचन सेवा समिति’ से जुड़े प्रभावशाली लोगों द्वारा निजी तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

मामले का सबसे संवेदनशील पहलू एक महिला साध्वी से जुड़ा है, जो वर्षों तक मंदिर की सेवा से जुड़ी रही। आरोप है कि मंदिर पर नियंत्रण पाने के उद्देश्य से उन्हें न केवल उनके अधिकारों से वंचित किया गया, बल्कि उनका आश्रय स्थल भी तोड़ दिया गया। साध्वी को जबरन बेदखल करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप पहले भी मीडिया में सामने आ चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है।

आवेदक द्वारा जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई है कि मंदिर और मेले की आय की शासन स्तर पर वित्तीय जांच कराई जाए, मंदिर संचालन समितियों की वैधानिकता की समीक्षा हो और पीड़ित महिला साध्वी को सम्मानपूर्वक पुनर्वास दिया जाए। इससे पूर्व 19 जनवरी 2025 को राज्यपाल के नाम भी शिकायत की जा चुकी है, लेकिन उस पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा आम है कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते जांच बार-बार ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है। आस्था के इस प्रमुख केंद्र पर लगे आरोपों ने न केवल मंदिर की छवि को धूमिल किया है, बल्कि प्रशासन की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब श्रद्धालु और आमजन कलेक्टर व एसपी की कार्रवाई की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।