सुपोषित छत्तीसगढ़ अभियान की प्रभावशाली शुरुआत, स्वस्थ बचपन और सशक्त मातृत्व की दिशा में बड़ा कदम

छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में “सुपोषित छत्तीसगढ़ अभियान” की शुरुआत की है। आठ संवेदनशील जिलों से प्रारंभ इस अभियान का उद्देश्य कुपोषण और एनीमिया से मुक्ति, स्वस्थ बचपन और सशक्त मातृत्व सुनिश्चित करना है।

Jan 9, 2026 - 17:41
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सुपोषित छत्तीसगढ़ अभियान की प्रभावशाली शुरुआत, स्वस्थ बचपन और सशक्त मातृत्व की दिशा में बड़ा कदम

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर|  छत्तीसगढ़ शासन के गठन के 25 वर्ष और वर्तमान राज्य सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में “सुपोषित छत्तीसगढ़ अभियान” की प्रभावशाली शुरुआत की गई है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में शुरू यह अभियान कुपोषण और एनीमिया जैसी गंभीर सामाजिक समस्याओं से निपटने के लिए राज्य सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

यह अभियान 1 जनवरी 2026 से प्रदेश के आठ संवेदनशील जिलों—बलरामपुर, सरगुजा, सूरजपुर, जशपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और बीजापुर—में एक साथ लागू किया गया है। अभियान का मुख्य उद्देश्य 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कुपोषण से मुक्त करना तथा 15 से 45 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं, विशेषकर गर्भवती और धात्री माताओं में एनीमिया की समस्या को प्रभावी रूप से कम करना है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि किसी भी राज्य का भविष्य उसके बच्चों के स्वास्थ्य और माताओं की सशक्तता पर निर्भर करता है। छत्तीसगढ़ सरकार कुपोषण के खिलाफ केवल योजनाओं तक सीमित न रहकर संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने इसे सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी बताया।

महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि आगामी छह महीनों में महिलाओं में रक्ताल्पता की दर में उल्लेखनीय कमी लाने, गंभीर एवं मध्यम कुपोषित बच्चों के पोषण स्तर में सुधार तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

अभियान के अंतर्गत समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन कार्यक्रम पर विशेष फोकस किया गया है। इसके तहत गंभीर और मध्यम कुपोषित बच्चों (एसएएम, एमएएम), संकटग्रस्त बच्चों तथा एनीमिक गर्भवती महिलाओं को लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से कवर किया जाएगा।

सुपोषण दूतों का चयन कर 70 प्रतिशत मध्यम और 30 प्रतिशत गंभीर कुपोषित बच्चों को गोद लिया जाएगा, जिनकी नियमित निगरानी और देखभाल की जाएगी। निर्धारित लक्ष्य पूर्ण होने पर सुपोषण दूतों और महिला स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

जिला स्तर पर निगरानी के लिए प्रबंध समितियों का गठन और स्थानीय निधि से पोषण आहार की व्यवस्था की गई है। जनसहयोग और सामुदायिक सहभागिता के साथ यह अभियान एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप ले रहा है, जो छत्तीसगढ़ को कुपोषण मुक्त बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा।