सतना बस स्टैंड बना 'कचरा स्टैंड': स्वच्छता के दावों की खुली पोल, नगर निगम की लापरवाही से जनता बेहाल

सतना के व्यस्ततम बस स्टैंड में फैली गंदगी और कचरे के ढेर ने नगर निगम के स्वच्छता दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों और व्यापारियों ने प्रशासनिक लापरवाही पर नाराजगी जताई है।

Feb 13, 2026 - 20:45
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सतना बस स्टैंड बना 'कचरा स्टैंड': स्वच्छता के दावों की खुली पोल, नगर निगम की लापरवाही से जनता बेहाल

UNITED NES OF ASIA. प्रदीप पाटकर, सतना। स्मार्ट सिटी बनने का दावा करने वाले सतना शहर की जमीनी हकीकत शहर के प्रमुख परिवहन केंद्र सतना बस स्टैंड पर साफ नजर आ रही है। शहर का सबसे व्यस्ततम बस स्टैंड इन दिनों कचरे के ढेर में तब्दील हो चुका है। जगह-जगह फैली गंदगी और सड़ांध ने स्वच्छता अभियान के दावों की पोल खोल कर रख दी है।

बस स्टैंड पर रोजाना हजारों यात्रियों की आवाजाही होती है, लेकिन यहां फैले कचरे और बदबू के कारण यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई यात्रियों को बस का इंतजार करते समय मुंह पर रुमाल रखकर बैठना पड़ रहा है। यात्रियों और स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि नगर निगम प्रशासन इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज कर रहा है।

स्थानीय दुकानदारों का आरोप है कि नियमित सफाई नहीं होने के कारण उनके व्यवसाय पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। दुकानदारों का कहना है कि कचरे के ढेर और दुर्गंध के कारण ग्राहक बस स्टैंड क्षेत्र में रुकने से बचते हैं, जिससे आर्थिक नुकसान हो रहा है।

बस स्टैंड क्षेत्र में कचरे के ढेर से बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। इसके साथ ही कचरे के आसपास आवारा पशुओं का जमावड़ा लगने से दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। यात्रियों का कहना है कि नगर निगम टैक्स तो नियमित रूप से वसूला जाता है, लेकिन बुनियादी सफाई व्यवस्था देने में प्रशासन पूरी तरह विफल नजर आ रहा है।

शहर को स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर स्थान दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थल की यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर रही है। नागरिकों का सवाल है कि क्या सफाई अभियान केवल कागजों तक सीमित रह गया है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि इस समस्या के उजागर होने के बाद जिम्मेदार अधिकारी सक्रिय होकर बस स्टैंड क्षेत्र की सफाई व्यवस्था को सुधारते हैं या यात्रियों और व्यापारियों को इसी बदहाल व्यवस्था के बीच अपनी दिनचर्या जारी रखने को मजबूर होना पड़ेगा।