समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन 2025–26: समयबद्ध भुगतान और सुव्यवस्थित व्यवस्था से किसानों का बढ़ा भरोसा
खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 में धमतरी जिले में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन पारदर्शी और किसान हितैषी ढंग से किया जा रहा है। अब तक 2.79 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी और हजारों किसानों को समय पर भुगतान से व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हुआ है।
UNITED NEWS OF ASIA.रिजवान मेमन, धमतरी। खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 के अंतर्गत धमतरी जिले में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता, सुचारु प्रबंधन और किसान हित को केंद्र में रखकर संचालित की जा रही है। जिले की 74 सहकारी समितियों के माध्यम से 100 उपार्जन केंद्रों में किसानों से धान की खरीदी की जा रही है, जिससे ग्रामीण अंचलों तक शासन की सुविधा सहज रूप से पहुंच रही है।
अब तक जिले में कुल 2,79,414.12 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है, जिसका कुल समर्थन मूल्य लगभग 662.57 करोड़ रुपये है। इस प्रक्रिया में 58,443 किसानों ने अपना धान विक्रय किया है। इनमें से 53,227 किसानों को अब तक 60,293.78 लाख रुपये का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जा चुका है। समयबद्ध और प्रत्यक्ष भुगतान से किसानों को त्वरित आर्थिक संबल मिला है और उपार्जन व्यवस्था पर उनका भरोसा और मजबूत हुआ है।
धान उठाव की प्रक्रिया भी निरंतर गति से जारी है। अब तक 49,982.80 मीट्रिक टन धान का उठाव किया जा चुका है, जबकि उपार्जन केंद्रों में 2,29,431.32 मीट्रिक टन धान शेष है। उपार्जित धान के शीघ्र निराकरण के लिए कस्टम मिलिंग की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। जिले में 166 पंजीकृत राइस मिलें हैं, जिन्हें कुल 7,90,608 मीट्रिक टन धान कस्टम मिलिंग हेतु अनुमति प्रदान की गई है।
प्रशासन द्वारा धान उठाव में तेजी लाने के उद्देश्य से अब तक 1,01,752.60 मीट्रिक टन धान के लिए डी.ओ. (डिलीवरी ऑर्डर) जारी किए जा चुके हैं। इसके साथ ही आगामी 24 दिसंबर 2025 की धान खरीदी के लिए किसानों को ऑनलाइन टोकन जारी कर सुविधा प्रदान की गई है, ताकि उन्हें अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े।
वहीं, मंडी अधिनियम 1972 के अंतर्गत अवैध धान भंडारण और परिवहन पर सख्त कार्रवाई भी की गई है। इस दौरान 3,407 कृषकों से संबंधित 112 प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें 4,619.5 क्विंटल धान जब्त किया गया तथा 2 वाहनों को भी जप्त किया गया है।
कुल मिलाकर धमतरी जिले में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन की यह प्रक्रिया शासन की किसान हितैषी नीतियों, मजबूत निगरानी व्यवस्था और समयबद्ध भुगतान का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है। इससे किसानों की सहभागिता लगातार बढ़ रही है और वे भरोसे के साथ शासन की योजनाओं से जुड़ रहे हैं।