बेमेतरा में प्राकृतिक एवं जैविक खेती कार्यशाला आयोजित, किसानों ने लिया रसायन मुक्त खेती अपनाने का संकल्प

बेमेतरा के टाउन हॉल में प्राकृतिक एवं जैविक खेती कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला में जैविक खाद निर्माण, प्राकृतिक खेती की तकनीकों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई तथा किसानों को जैविक खेती अपनाने की शपथ दिलाई गई।

Jun 16, 2026 - 15:23
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बेमेतरा में प्राकृतिक एवं जैविक खेती कार्यशाला आयोजित, किसानों ने लिया रसायन मुक्त खेती अपनाने का संकल्प

UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा l किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती के प्रति जागरूक करने तथा टिकाऊ और लाभकारी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बेमेतरा जिले के टाउन हॉल में प्राकृतिक एवं जैविक खेती कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विकासखंडों से आए किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संजय श्रीवास्तव रहे। विशिष्ट अतिथियों में दीपेश साहू, प्रहलाद रजक, कल्पना योगेश तिवारी और विजय सिन्हा शामिल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अजय साहू ने की जबकि समन्वयन युवराज ठाकुर द्वारा किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. चौलेश्वर चंद्राकर और राकेश तिवारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ कृषि एवं कृषि संबद्ध विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी के अवलोकन से हुआ। इसके बाद भगवान बलराम की पूजा-अर्चना कर कार्यशाला की औपचारिक शुरुआत की गई। अतिथियों ने किसानों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने का आह्वान किया।

कृषि विज्ञान केंद्र बेमेतरा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर खरे ने जैविक खाद निर्माण और उसके वैज्ञानिक प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जैविक खेती मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, कार्बनिक पदार्थों की मात्रा में वृद्धि करने तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने वर्मीकम्पोस्ट, वर्मीवॉश, गोबर खाद, नाडेप खाद तथा हरी खाद के रूप में ढैंचा, सनई और मूंग के उपयोग की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि कम्पोस्ट खाद, वर्मीकम्पोस्ट और गोबर खाद जैसी जैविक खादें मिट्टी की संरचना में सुधार करती हैं, जल धारण क्षमता बढ़ाती हैं और पौधों को आवश्यक पोषक तत्व संतुलित रूप से उपलब्ध कराती हैं। इससे खेती की लागत घटती है और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होती है।

कार्यशाला के दौरान किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने की शपथ भी दिलाई गई। प्रगतिशील किसान रोहित पटेल और मोहित साहू ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत में कमी आई है तथा बाजार में उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है।

कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र की प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रजनी डी. अगासे ने प्राकृतिक खेती की आवश्यकता और लाभों पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. जितेंद्र जोशी, संजय मानिकपुरी, डॉ. डोमन सिंह टेकाम और डॉ. लव कुमार ने आधुनिक एवं प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों, अवशेष प्रबंधन तथा जैविक कल्चर के उपयोग की जानकारी किसानों को दी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संजय श्रीवास्तव ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने किसानों को “प्रकृति के साथ खेती, स्वस्थ किसान-समृद्ध भारत” का संकल्प दिलाते हुए प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में उप संचालक कृषि मोरध्वज डड़सेना ने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों और किसानों का आभार व्यक्त किया। कार्यशाला में कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।