महासमुंद में बाल श्रम के लिए ले जाए जा रहे 6 नाबालिग बच्चों का रेस्क्यू, आयोग ने दिए कार्रवाई के निर्देश

महासमुंद जिले के तुमगांव थाना क्षेत्र में बाल श्रम के लिए ले जाए जा रहे 6 नाबालिग बच्चों को छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा की तत्परता से मुक्त कराया गया। आयोग ने वाहन चालक और संबंधित बैंड पार्टी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

Jun 21, 2026 - 11:42
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महासमुंद में बाल श्रम के लिए ले जाए जा रहे 6 नाबालिग बच्चों का रेस्क्यू, आयोग ने दिए कार्रवाई के निर्देश

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l महासमुंद जिले के तुमगांव थाना क्षेत्र में बाल श्रम का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां श्रम कार्य के लिए ले जाए जा रहे 6 नाबालिग बच्चों को समय रहते मुक्त कराया गया। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा की सक्रियता और तत्परता से यह कार्रवाई संभव हो सकी। घटना के बाद संबंधित वाहन चालक और बैंड पार्टी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

जानकारी के अनुसार वर्णिका शर्मा महासमुंद जिले के प्रवास पर थीं। इसी दौरान तुमगांव थाना क्षेत्र से गुजरते समय उनकी नजर एक पिकअप वाहन पर पड़ी, जिसमें कुछ नाबालिग बच्चों को बैंड पार्टी के साथ ले जाया जा रहा था। बच्चों की स्थिति और परिस्थितियों को देखकर बाल श्रम की आशंका होने पर उन्होंने तत्काल हस्तक्षेप किया और मौके पर ही कार्रवाई शुरू करवाई।

अध्यक्ष ने लगभग आधे घंटे तक मौके पर रुककर पूरे मामले की निगरानी की। उन्होंने तत्काल एसजेपीयू (स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट), जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) और जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ) की टीम को निर्देशित किया। अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और सभी 6 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू कर तुमगांव थाना भेजा गया।

जांच के दौरान यह भी पाया गया कि बच्चों को जिस वाहन में ले जाया जा रहा था, उसका क्रमांक CG06GM4266 है। आयोग ने इस वाहन का उपयोग बाल श्रम के उद्देश्य से किए जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए वाहन चालक और संबंधित बैंड पार्टी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

वर्णिका शर्मा ने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि बाल श्रम जैसी घटनाओं को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बच्चों का बचपन, शिक्षा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी बच्चे को श्रम में लगाना कानूनन अपराध है। उन्होंने चाइल्डलाइन और संबंधित विभागों को लगातार निगरानी और निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

आयोग ने संकेत दिया है कि इस मामले में बाल अधिकार संरक्षण नियम 2005 की धारा 13 और सहपठित धारा 14 के तहत संज्ञान लिया जाएगा। इसके तहत पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा और बाल श्रम उन्मूलन के लिए आयोग पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने समाज से भी अपील की कि यदि कहीं बाल श्रम जैसी गतिविधियां दिखाई दें तो तत्काल प्रशासन और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी दें। प्रशासन और आयोग की इस त्वरित कार्रवाई को बाल अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।