विद्यारंभ अभियान से बच्चों के शैक्षणिक जीवन की नई शुरुआत, आंगनबाड़ी से स्कूल तक बन रहा मजबूत सेतु
छत्तीसगढ़ में विद्यारंभ अभियान के तहत 6 वर्ष पूर्ण कर चुके बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण-पत्र देकर विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्कूल शिक्षा विभाग की इस संयुक्त पहल का उद्देश्य बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को सशक्त बनाना और आंगनबाड़ी से विद्यालय तक सहज संक्रमण सुनिश्चित करना है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को अधिक सुदृढ़ और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से विद्यारंभ अभियान संचालित किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयासों से चलाए जा रहे इस अभियान के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में पूर्व-प्राथमिक शिक्षा पूर्ण कर चुके 6 वर्ष आयु के बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण-पत्र प्रदान कर विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जा रहा है। यह पहल बच्चों के शैक्षणिक जीवन की नई शुरुआत को उत्सव के रूप में मनाने का अवसर प्रदान कर रही है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य आंगनबाड़ी से विद्यालय तक बच्चों के सहज और सुगम संक्रमण को सुनिश्चित करना है। इसके तहत प्रदेशभर के आंगनबाड़ी केंद्रों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जहां बच्चों को सम्मानपूर्वक विद्यारंभ प्रमाण-पत्र प्रदान किए जा रहे हैं। साथ ही अभिभावकों को बच्चों की नियमित शिक्षा, विद्यालय में उपस्थिति और सर्वांगीण विकास के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को खेल-खेल में सीखने की पद्धति के माध्यम से शिक्षा प्रदान की जाती है। यहां भाषा विकास, संज्ञानात्मक क्षमता, सामाजिक व्यवहार और भावनात्मक विकास से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को विद्यालयी शिक्षा के लिए तैयार किया जाता है। इस प्रारंभिक शिक्षा से बच्चों में सीखने की रुचि विकसित होती है और वे विद्यालय के वातावरण में आसानी से समायोजित हो पाते हैं।
विद्यारंभ अभियान इस सीखने की प्रक्रिया को औपचारिक पहचान देने का कार्य कर रहा है। बच्चों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर उनके प्रयासों और सीखने की यात्रा को सम्मानित किया जा रहा है। यह प्रमाण-पत्र उनके लिए केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में पहला सम्मान और प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।
अभियान के दौरान विद्यालय प्रवेश उत्सव भी आयोजित किए जा रहे हैं। नवप्रवेशी बच्चों का तिलक लगाकर, पुष्प भेंट कर और स्वागत गीतों के माध्यम से अभिनंदन किया जाता है। इस तरह का स्वागत बच्चों में विद्यालय के प्रति सकारात्मक भावनाएं विकसित करता है और उनमें आत्मविश्वास तथा उत्साह का संचार करता है।
राज्य शासन का मानना है कि जीवन के प्रारंभिक वर्ष किसी भी बच्चे के बौद्धिक, शारीरिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास की मजबूत नींव रखते हैं। इसी सोच के अनुरूप नई शिक्षा नीति-2020 में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को विशेष महत्व दिया गया है। इस नीति के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया है, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की निरंतरता मिल सके।
विद्यारंभ अभियान के माध्यम से प्रदेश के हजारों बच्चों को विद्यालयी शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। यह अभियान न केवल बच्चों के शैक्षणिक सफर की शुरुआत को यादगार बना रहा है, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।