सरकारी गाड़ी के निजी इस्तेमाल का आरोप, मेडिकल कॉलेज की डीन पर डीजल खपत को लेकर उठे सवाल

महासमुंद शासकीय मेडिकल कॉलेज की डीन पर सरकारी वाहन के कथित निजी उपयोग और निर्धारित सीमा से अधिक डीजल खपत का आरोप लगा है। मामले में जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जबकि कांग्रेस विधायक ने भी जांच और कार्रवाई की मांग की है।

Jul 14, 2026 - 14:04
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सरकारी गाड़ी के निजी इस्तेमाल का आरोप, मेडिकल कॉलेज की डीन पर डीजल खपत को लेकर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. महासमुंद। शासकीय मेडिकल कॉलेज महासमुंद एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और वित्तीय अनुशासन को लेकर चर्चा में है। मेडिकल कॉलेज की डीन पर शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए सरकारी वाहन के कथित निजी उपयोग और निर्धारित सीमा से अधिक डीजल खपत के आरोप सामने आए हैं। उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर उठे इन सवालों ने सरकारी संसाधनों के उपयोग और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि संबंधित अधिकारियों की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।

जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज की डीन को शासन की ओर से स्विफ्ट डिजायर कार (क्रमांक CG-02-AU-1763) आवंटित की गई है। इस वाहन के संचालन के लिए प्रतिमाह 80 लीटर डीजल की पात्रता निर्धारित है। इस आधार पर जनवरी 2025 से फरवरी 2026 तक 11 माह में अधिकतम 880 लीटर डीजल की खपत स्वाभाविक मानी जाती है।

बताया जा रहा है कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार इसी अवधि में वाहन में 1145 लीटर डीजल दर्ज किया गया, जो निर्धारित सीमा से 265 लीटर अधिक है। इसी अतिरिक्त खपत को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि यह डीजल किन यात्राओं और किस उद्देश्य से उपयोग किया गया।

मामले को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि मेडिकल कॉलेज के डीन का कार्यक्षेत्र मुख्य रूप से संस्थान परिसर तक सीमित रहता है। इसके अलावा डीन के लिए उपलब्ध शासकीय आवास भी मेडिकल कॉलेज परिसर के समीप स्थित है। ऐसे में लगातार निर्धारित सीमा से अधिक ईंधन खपत प्रशासनिक पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़े कर रही है।

सूत्रों के अनुसार सरकारी वाहन का उपयोग निजी आवागमन, विशेषकर रायपुर आने-जाने के लिए किए जाने की चर्चा लंबे समय से होती रही है। यदि जांच में ऐसे आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और वित्तीय अनुशासन के उल्लंघन का मामला बन सकता है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

मामले में पक्ष जानने के लिए डीन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने इस विषय पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं वाहन प्रभारी से भी जानकारी लेने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। अधिकारियों की चुप्पी के कारण मामले को लेकर संदेह और बढ़ गया है।

इस बीच खल्लारी विधायक एवं कांग्रेस जिला अध्यक्ष द्वारकाधीश यादव ने मेडिकल कॉलेज में कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा विधानसभा में उठाने की बात कही है। उनका कहना है कि मेडिकल कॉलेज से जुड़े कई मामलों की शिकायत पहले भी की जा चुकी है और अब डीजल खपत से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल यह मामला आरोपों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर चर्चा में है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रशासनिक स्तर पर जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।