बैलाडीला की पहाड़ियों से घिरे इस गांव तक पहुंचना सामान्य परिस्थितियों में भी चुनौतीपूर्ण माना जाता है। बावजूद इसके, स्वास्थ्य टीम ने अपने दायित्व को प्राथमिकता देते हुए कठिन रास्तों को पार किया और गांव-गांव जाकर लोगों के घरों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाईं। इस पहल ने यह साबित किया कि अब स्वास्थ्य सेवाएं इंतजार नहीं, बल्कि सक्रिय पहल के रूप में सामने आ रही हैं।
गांव पहुंचने के बाद टीम ने कुल 62 ग्रामीणों की विस्तृत स्वास्थ्य जांच की। इनमें बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे शामिल थे। कई ग्रामीणों के लिए यह पहली बार था जब उन्होंने इस तरह की समग्र स्वास्थ्य जांच का अनुभव किया। जांच के दौरान मलेरिया और सिकल सेल (हीमोग्लोबिन) की जांच के साथ-साथ मोतियाबिंद और कुष्ठ रोग के संभावित मामलों की पहचान की गई।
स्वास्थ्य टीम ने गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच की और बच्चों का टीकाकरण भी सुनिश्चित किया। यह पहल न केवल बीमारियों की पहचान तक सीमित रही, बल्कि ग्रामीणों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने में भी सहायक साबित हुई।
जांच के दौरान 4 मरीजों की स्थिति गंभीर पाई गई, जिन्हें तुरंत जिला अस्पताल रेफर किया गया। इनमें एक गर्भवती महिला, एक मोतियाबिंद से पीड़ित मरीज और दो मलेरिया पॉजिटिव मरीज शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, समय पर इन मरीजों की पहचान और रेफरल से संभावित जटिलताओं को टाला जा सकता है।
यह अभियान 13 अप्रैल से पूरे जिले में संचालित किया जा रहा है, जिसके तहत 76 स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से टीमें लगातार गांव-गांव पहुंच रही हैं। इस पहल का उद्देश्य केवल उपचार देना नहीं, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों में छिपी बीमारियों की समय रहते पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना है।
लोहागांव जैसे दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीम की यह पहल इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब प्रशासन स्वास्थ्य सुविधाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। जहां पहले दूरी और संसाधनों की कमी बड़ी बाधा हुआ करती थी, वहीं अब इन बाधाओं को पार करने की ठोस कोशिशें की जा रही हैं।
इस तरह के प्रयास न केवल ग्रामीणों के स्वास्थ्य में सुधार लाएंगे, बल्कि उन्हें मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग ने यह संदेश दिया है कि हर नागरिक तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना ही उनकी प्राथमिकता है, चाहे रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो।