खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने जनजातीय खिलाड़ियों को दिया नया मंच, छत्तीसगढ़ की किरण पिस्दा और अनुष्का भगत ने बिखेरी चमक

छत्तीसगढ़ में आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने देशभर के जनजातीय खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच दिया। प्रतियोगिता में कई उभरते खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि छत्तीसगढ़ की फुटबॉलर किरण पिस्दा और तैराक अनुष्का भगत ने विशेष रूप से लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

May 7, 2026 - 12:38
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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने जनजातीय खिलाड़ियों को दिया नया मंच, छत्तीसगढ़ की किरण पिस्दा और अनुष्का भगत ने बिखेरी चमक

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर  सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने देशभर के जनजातीय खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का एक बड़ा और ऐतिहासिक मंच प्रदान किया। इस आयोजन में विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से आए खिलाड़ियों ने खेल कौशल, जुनून और संघर्ष की अद्भुत मिसाल पेश की। कई खिलाड़ियों के लिए यह राष्ट्रीय स्तर की इतनी बड़ी प्रतियोगिता में पहला अनुभव था, जबकि कुछ खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से भविष्य के लिए नई उम्मीदें जगाईं।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के पहले संस्करण में देश के 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के करीब 2000 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती जैसे खेल शामिल किए गए, जिनमें कुल 106 स्वर्ण पदकों के लिए मुकाबले हुए। इसके अलावा मल्लखंभ और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों को प्रदर्शन खेल के रूप में प्रस्तुत किया गया।

इस बड़े आयोजन की मेजबानी छत्तीसगढ़ के तीन प्रमुख शहरों रायपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर को सौंपी गई थी। खेल प्रतियोगिताओं के साथ-साथ आयोजन में जनजातीय संस्कृति और परंपराओं की झलक भी देखने को मिली, जिसने इस आयोजन को और खास बना दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन देश के जनजातीय क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत जहां 2030 राष्ट्रमंडल खेलों और 2036 ओलंपिक की संभावित मेजबानी की तैयारी कर रहा है, वहीं खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे मंच भविष्य के खिलाड़ियों को तैयार करने में मददगार साबित हो सकते हैं।

प्रतियोगिता में कई खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा। तैराकी में कर्नाटक के युवा तैराक मणिकांता एल. और ओडिशा की अंजलि मुंडा ने शानदार प्रदर्शन किया। वहीं तीरंदाजी में झारखंड की विश्व यूथ चैंपियन कोमालिका बारी और गुजरात की भार्गवी भगोरा ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

वेटलिफ्टिंग में झारखंड के बाबूलाल हेम्ब्रम और ओडिशा की झिल्ली दलाबेहरा ने भी अपनी ताकत और तकनीक से प्रभावित किया। एथलेटिक्स में झारखंड के धावक शिव कुमार सोरेन ने शानदार प्रदर्शन कर अपनी क्षमता दिखाई।

हालांकि पूरे आयोजन के दौरान छत्तीसगढ़ की दो खिलाड़ी सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं। अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर किरण पिस्दा ने अपने खेल से लोगों को प्रभावित किया, जबकि तैराक अनुष्का भगत ने चार रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इन दोनों खिलाड़ियों ने न केवल छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया, बल्कि प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरित किया।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने यह साबित कर दिया कि देश के जनजातीय इलाकों

में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल सही मंच, प्रशिक्षण और अवसर की है। यह आयोजन आने वाले वर्षों में भारतीय खेल जगत के लिए नई प्रतिभाओं की मजबूत नींव बन सकता है।