राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण फोरम नरेंद्र मोदी विचार मंच के प्रदेश महासचिव दास जी साहू ने कहा कि कंपनी प्रबंधन ग्रामीणों को अपने पक्ष में करने के लिए धनबल का उपयोग करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्योग स्थापना के लिए स्थानीय लोगों की भावनाओं और विरोध को नजरअंदाज किया जा रहा है।
दास जी साहू ने कहा कि यदि ग्राम देवरी के ग्रामीण उद्योग स्थापना का विरोध कर रहे हैं, तो उनकी भावनाओं और अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण फोरम नरेंद्र मोदी विचार मंच के कार्यकर्ता ग्रामीणों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे और गांव में उद्योग स्थापना के खिलाफ आंदोलन में उनका समर्थन करेंगे।
उन्होंने कंपनी प्रबंधन से अपील करते हुए कहा कि जहां स्थानीय जनता और ग्रामीण उद्योग नहीं चाहते, वहां जबरदस्ती परियोजना स्थापित करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि कंपनी ऐसे स्थान का चयन करे जहां स्थानीय लोग उद्योग का स्वागत करें और विकास कार्यों में सहयोग देने के लिए तैयार हों।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित उद्योग से क्षेत्र के पर्यावरण, कृषि भूमि और स्थानीय जीवनशैली पर असर पड़ सकता है। हालांकि कंपनी प्रबंधन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन ग्रामीणों में इस मुद्दे को लेकर लगातार नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि उद्योग लगने से प्रदूषण और जल स्रोतों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे खेती और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। ग्रामीणों ने प्रशासन से भी मांग की है कि उनकी राय और सहमति के बिना किसी भी परियोजना को मंजूरी न दी जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी औद्योगिक परियोजना के लिए स्थानीय समुदाय की सहमति और पर्यावरणीय संतुलन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि ग्रामीणों की चिंताओं को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया, तो यह विवाद आगे और बढ़ सकता है।
राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण फोरम द्वारा समर्थन मिलने के बाद अब इस आंदोलन को और मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में ग्रामीणों और संगठन की ओर से विरोध प्रदर्शन या अन्य आंदोलनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
ग्राम देवरी में प्रस्तावित उद्योग को लेकर बढ़ता विरोध अब प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के लिए चुनौती बनता जा रहा है। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या समाधान निकलता है और ग्रामीणों की मांगों पर कितना ध्यान दिया जाता है।