10 माह बाद भी नहीं मिला जवाब, 8.5 करोड़ का धान कहाँ गया? जांच पर उठे गंभीर सवाल

कबीरधाम जिले के बाजारा चारभाठा और बघर्रा संग्रहण केंद्रों से करोड़ों रुपये मूल्य के धान की कमी के मामले में 10 माह बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है। संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट लंबित है, जबकि कार्रवाई और जवाबदेही को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।

Jul 7, 2026 - 13:33
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10 माह बाद भी नहीं मिला जवाब, 8.5 करोड़ का धान कहाँ गया? जांच पर उठे गंभीर सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l कबीरधाम जिले में धान खरीदी सत्र 2024-25 के दौरान बाजारा चारभाठा और बघर्रा संग्रहण केंद्रों से करोड़ों रुपये मूल्य के धान की कमी का मामला अब भी अनसुलझा बना हुआ है। कथित रूप से लगभग 8.5 करोड़ रुपये मूल्य के धान की कमी सामने आने के करीब दस माह बाद भी संयुक्त जांच समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर सकी है। मामले में जांच की धीमी गति और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने आरोप लगाया है कि शिकायत सामने आने के बाद कलेक्टर ने जिला खाद्य शाखा, जिला विपणन विभाग और धान खरीदी से जुड़े नोडल अधिकारियों की संयुक्त जांच समिति गठित की थी। उम्मीद थी कि जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी, लेकिन कई महीने बीतने के बावजूद न तो रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और न ही किसी पर ठोस कार्रवाई की गई।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बाजारा चारभाठा संग्रहण केंद्र में 6 लाख 46 हजार 486 क्विंटल धान के मुकाबले 22 हजार 997 क्विंटल धान कम पाया गया। वहीं बघर्रा संग्रहण केंद्र में 1 लाख 57 हजार 42 क्विंटल धान के विरुद्ध 4 हजार 673 क्विंटल की कमी दर्ज की गई। दोनों केंद्रों को मिलाकर करीब 27 हजार 670 क्विंटल धान की कमी बताई गई, जिसकी अनुमानित कीमत 8.5 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

आरोप है कि बाजारा चारभाठा केंद्र के प्रभारी को प्रारंभिक स्तर पर निलंबित किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें पुनः बहाल कर दिया गया। वहीं बघर्रा केंद्र के प्रभारी के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई और अगले धान खरीदी सत्र में भी उन्हें जिम्मेदारी सौंप दी गई। इससे जांच की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

आकाश केशरवानी ने यह भी दावा किया है कि मार्कफेड के आंकड़ों के अनुसार पूरे जिले में धान खरीदी सत्र 2024-25 के दौरान 46 हजार 360 क्विंटल से अधिक धान की कमी दर्ज हुई, जिसकी अनुमानित कीमत 14.37 करोड़ रुपये से अधिक है। वहीं सत्र 2025-26 में भी लगभग 52 हजार क्विंटल धान की कमी सामने आने का आरोप लगाया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत 16 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। उन्होंने मामले में उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

इस मामले में पहले धान की कमी के लिए चूहों, दीमक, कीटों और मौसम जैसी वजहों का भी उल्लेख सामने आया था, जिससे विवाद और बढ़ गया। हालांकि अब तक जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है और न ही दोष तय किए गए हैं। ऐसे में करोड़ों रुपये के धान की कमी, जांच में हो रही देरी और कार्रवाई के अभाव को लेकर प्रशासन की जवाबदेही पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।