यह अभियान ‘एक्सेस टू जस्टिस फॉर चिल्ड्रेन’ कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है और यह राष्ट्रीय बाल अधिकार एवं संरक्षण आयोग द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी अभियान का हिस्सा है। इस पहल में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन नेटवर्क से जुड़े संगठनों का सहयोग मिल रहा है, जो बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए देशभर में कार्यरत हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले प्रदेश के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा बाल विवाह मुक्ति रथ को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जा चुका है, जिससे जिले में सामाजिक जागरूकता की मुहिम लगातार आगे बढ़ रही है।
इस अवसर पर कलेक्टर गोपाल वर्मा ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनका स्थान स्कूलों में है, न कि मजदूरी करने वाले स्थानों पर। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल श्रम न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है।
उन्होंने आम नागरिकों, व्यापारियों और नियोक्ताओं से अपील की कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और यदि कहीं भी बाल श्रम होता दिखाई दे, तो तत्काल प्रशासन को सूचित करें। साथ ही उन्होंने बाल श्रम के खिलाफ तैयार जागरूकता पोस्टरों का विमोचन करते हुए संस्था के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम में बाल श्रम मुक्ति रथ के संयोजक आशु चंद्रवंशी ने बताया कि यह रथ जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भ्रमण कर लोगों को बाल श्रम कानूनों और उनके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करेगा। रथ के माध्यम से लाउडस्पीकर, पोस्टर और पर्चों के जरिए यह संदेश दिया जाएगा कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से काम कराना दंडनीय अपराध है और इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है।
इस अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य श्रम में लगे बच्चों की पहचान कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना भी है। रथ जिले के विभिन्न हाट-बाजारों, बस स्टैंडों और संवेदनशील क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों से संवाद स्थापित करेगा और जागरूकता फैलाएगा।
इस अवसर पर जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी चंचल यादव, बाल संरक्षण अधिकारी क्रांति साहू, खेमलाल खटर्जी तथा जिला समन्वयक ललित सिन्हा सहित अन्य अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
यह पहल कबीरधाम जिले को बाल श्रम और बाल विवाह मुक्त बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है, जो समाज और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से निश्चित ही सकारात्मक परिणाम देगा।