भोरमदेव महोत्सव 2026: संस्कृति संध्या में छत्तीसगढ़ी रंग, भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम
भोरमदेव महोत्सव 2026 की संस्कृति संध्या में दिलीप षडंगी और आरु साहू की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोकगीत, भजन और नृत्य से महोत्सव परिसर देर रात तक गूंजता रहा।
UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा | भोरमदेव महोत्सव 2026 की संस्कृति संध्या में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक और शास्त्रीय परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूरे कार्यक्रम में गीत, संगीत और नृत्य की रंगारंग प्रस्तुतियों ने ऐसा माहौल बनाया कि दर्शक देर रात तक झूमते नजर आए। महोत्सव परिसर तालियों की गूंज और उत्साह से सराबोर रहा।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहे प्रदेश के सुप्रसिद्ध जगराता एवं लोकगायक दिलीप षडंगी, जिन्होंने अपनी सुमधुर आवाज और भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने “हर हर भोला गुरु महादेव…”, “लाली लाली चुनरी ओढ़े दाई मोर…” जैसे भक्ति गीतों से माहौल को श्रद्धामय बना दिया। वहीं “छुनूर छुनूर पैरी बाजे रे गोरी…” और “बोरे बासी संग म खवाहु…” जैसे छत्तीसगढ़ी गीतों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनकी प्रस्तुति में भक्ति और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिससे पूरा परिसर देर रात तक गूंजता रहा।
इसी क्रम में लोकप्रिय लोकगायिका आरु साहू ने अपनी शानदार प्रस्तुति से महोत्सव में चार चांद लगा दिए। उन्होंने “मैया झुप-झूप महुला नचाई रे…”, “सुआ गीत तरी हरि नाना…” और “सावन म शिव जी ला मानबो…” जैसे गीतों के माध्यम से दर्शकों को लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया। उनके गीतों ने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया और दर्शक देर रात तक झूमते रहे।
संस्कृति संध्या में लोकनृत्य और शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों का मन मोह लिया। ग्राम बरपानी के मोहन द्वारा प्रस्तुत बैगा जनजाति का पारंपरिक नृत्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसने आदिवासी संस्कृति की झलक पेश की।
कवर्धा और बोड़ला स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राओं ने “रामेश्वरम दर्शन” और “नरसिंह अवतार” पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत कर कार्यक्रम को भक्तिमय बना दिया। शास्त्रीय नृत्य की कड़ी में रायपुर की अक्षिता दुबे और कवर्धा की दुर्गेश्वरी चंद्रवंशी ने कत्थक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
इसके अलावा बिलासपुर के युवराज सिंह लोनिया ने भजन प्रस्तुति देकर माहौल को आध्यात्मिक बना दिया, वहीं अध्या पांडे ने भरतनाट्यम नृत्य से अपनी कला का प्रदर्शन किया। मोहम्मद असन की वाद्य प्रस्तुति ने भी दर्शकों को खासा प्रभावित किया और उनकी धुनों पर लोग झूम उठे।
कार्यक्रम में कौशल साहू (लक्ष्य), रिंती लाल, मोहम्मद अनस, पितेलाल पटेल, धनीदास मानिकपुरी और पवन चेलक सहित कई अन्य कलाकारों ने भी अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
भोरमदेव महोत्सव की यह संस्कृति संध्या न केवल मनोरंजन का माध्यम बनी, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपरा और कला को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने का एक सफल मंच भी साबित हुई।