रात के अंधेरे में अवैध उत्खनन
स्थानीय सूत्रों के अनुसार रेत माफिया रात के समय ट्रैक्टरों के जरिए नदी से रेत निकालकर उसे निजी भंडारण स्थलों पर डंप कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह रेत बिना वैध दस्तावेज के संग्रहित की जाती है।
रॉयल्टी पर्ची का कथित दुरुपयोग
आरोप है कि बिछिया टोला खदान की रॉयल्टी पर्चियों का उपयोग भंडारण से काटकर मध्यप्रदेश तक रेत परिवहन में किया जा रहा है।
खास बात यह है कि खदान अनुबंध के अनुसार शाम के बाद संचालन बंद होना चाहिए, लेकिन रात में भी रॉयल्टी पर्ची काटे जाने की बात सामने आ रही है।
न्यायालय के आदेशों की अनदेखी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि उच्च न्यायालय के स्टे के बावजूद खदान से संबंधित गतिविधियां जारी हैं। यदि यह सही है, तो यह न्यायालय के आदेशों की अवहेलना का मामला बन सकता है।
प्रशासनिक निष्क्रियता पर सवाल
जिले में ईमानदार कलेक्टर की छवि के बावजूद माइनिंग विभाग की कार्यवाही पर सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि अवैध भंडारण स्थलों पर न तो फेंसिंग है और न ही पर्यावरणीय मानकों का पालन, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
स्थानीय अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध
एसडीएम केल्हारी और तहसीलदार की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। कुछ दिन पहले एसडीएम द्वारा कार्रवाई कर वाहनों को जब्त करने की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में मामला शांत हो गया।
पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल
थाना प्रभारी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कार्रवाई के बाद भी ट्रैक्टरों को जल्द ही छोड़ दिया जाता है, जिससे अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी
स्थानीय विधायक रेणुका सिंह द्वारा पहले रेत माफियाओं पर सख्त कार्रवाई के दावे किए गए थे, लेकिन वर्तमान स्थिति में उनकी चुप्पी भी सवालों के घेरे में है।