ग्राम सिपाही के ग्रामीणों का विरोध — चमारी में प्रस्तावित देशी मदिरा दुकान को स्थानांतरित करने की उठी मांग
कांकेर जिले के ग्राम सिपाही के ग्रामीणों ने चमारी में प्रस्तावित देशी मदिरा दुकान के चयन का विरोध किया है। ग्रामीणों ने इसे विद्यालयों और मुख्य मार्ग के निकट होने के कारण सामाजिक एवं सुरक्षा दृष्टि से अनुचित बताया और दुकान को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की।
UNITED NEWS OF ASIA. राजेन्द्र मंडावी, कांकेर। कांकेर जिले के ग्राम पंचायत बोदा के आश्रित ग्राम चमारी, सिपाही में आबकारी विभाग द्वारा देशी मदिरा दुकान संचालित करने के लिए प्रस्तावित स्थान को लेकर ग्रामीणों में गहरा असंतोष है। ग्रामीणों ने इस चयन के विरोध में आवाज उठाते हुए इसे सामाजिक और शैक्षणिक वातावरण के लिए हानिकारक बताया है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित मदिरा दुकान उनके गांव से मात्र 200 मीटर की दूरी पर स्थापित की जा रही है। यह स्थान संस्कार विद्यापीठ विद्यालय से भी केवल 300 मीटर की दूरी पर है। इसके अलावा इसी मार्ग से सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सेतगंगा, शासकीय माध्यमिक विद्यालय सेतगंगा, पूर्व माध्यमिक शाला फास्टरपुर और नवीन महाविद्यालय फास्टरपुर के सैकड़ों विद्यार्थी प्रतिदिन आवागमन करते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि यह मार्ग मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत निर्मित सिंगल रोड है, जहां दिनभर विद्यार्थियों और ग्रामीणों की आवाजाही रहती है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि यदि इस मार्ग के किनारे मदिरा दुकान खोली जाती है, तो क्षेत्र में अनुशासनहीनता, असुरक्षा और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
ग्रामीणों ने कहा कि शराब दुकान की स्थापना से विद्यार्थियों के लिए असुरक्षित माहौल बनेगा और महिलाओं के आवागमन में भी असुविधा होगी। साथ ही गांव का सामाजिक वातावरण और शैक्षणिक परिवेश प्रभावित होगा।
ग्राम सिपाही के ग्रामीणों — सुभचरण, कैलाश साहू और अन्य नागरिकों ने ग्राम पंचायत सेमरकोना के सरपंच के साथ मिलकर कलेक्टर, जिला आबकारी अधिकारी तथा थाना फास्टरपुर को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में जनहित और सामाजिक शांति को ध्यान में रखते हुए दुकान को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि शासन को इस विषय पर संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और शिक्षा एवं सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उचित निर्णय लेना चाहिए। उनका स्पष्ट कहना है कि गांव के पास शराब दुकान खोलना केवल असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा, इसलिए इसे तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित किया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो वे सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन करेंगे और आंदोलन की राह अपनाने को मजबूर होंगे।
यह विरोध न केवल सामाजिक सुरक्षा का प्रश्न है, बल्कि ग्रामीणों के आत्मसम्मान और उनके बच्चों के सुरक्षित भविष्य की आवाज भी है।