गौरेला-पेंड्रा-मरवाही का विष्णुभोग चावल बना नई पहचान, मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने की सराहना

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का पारंपरिक विष्णुभोग चावल अब स्थानीय पहचान के साथ ग्रामीण आजीविका का मजबूत माध्यम बन रहा है। मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने इसकी गुणवत्ता और महिला स्व-सहायता समूहों के प्रयासों की सराहना करते हुए स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और बाजार विस्तार पर जोर दिया।

Jul 7, 2026 - 10:52
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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही का विष्णुभोग चावल बना नई पहचान, मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने की सराहना

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का पारंपरिक विष्णुभोग चावल अब जिले की नई पहचान बनकर उभर रहा है। अपनी प्राकृतिक सुगंध, उत्कृष्ट गुणवत्ता और पारंपरिक स्वाद के कारण यह चावल प्रदेश ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी लोकप्रियता हासिल कर रहा है। जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा किए जा रहे उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन के प्रयासों ने इस स्थानीय उत्पाद को नई पहचान दिलाई है।

जिले के प्रवास पर पहुंचे कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब का स्वागत कलेक्टर संतोष कुमार देवांगन ने जिले के प्रसिद्ध विष्णुभोग चावल का पैकेट भेंट कर किया। यह सम्मान केवल एक कृषि उत्पाद का नहीं बल्कि जिले की समृद्ध कृषि परंपरा, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रतीक भी रहा।

इस अवसर पर कलेक्टर संतोष कुमार देवांगन ने मंत्री को बताया कि बिहान योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूहों की महिलाएं विष्णुभोग चावल के उत्पादन से लेकर उसकी पैकेजिंग और विपणन तक की पूरी प्रक्रिया संभाल रही हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं को नियमित आय का स्रोत मिला है, वहीं स्थानीय किसानों को भी अपनी उपज का बेहतर बाजार उपलब्ध हो रहा है। प्रशासन लगातार इस उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने और इसे व्यापक बाजार तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रहा है।

मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने विष्णुभोग चावल की गुणवत्ता और जिले के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह उत्पाद गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की समृद्ध कृषि संस्कृति और महिला स्व-सहायता समूहों की मेहनत का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना केवल आर्थिक गतिविधि नहीं बल्कि क्षेत्रीय पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का प्रभावी माध्यम भी है। ऐसे उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन को और मजबूत किया जाना चाहिए ताकि किसानों और महिला समूहों की आय में लगातार वृद्धि हो सके।

कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर संतोष कुमार देवांगन ने हरिभूमि एवं आईएनएच के प्रधान संपादक हिमांशु द्विवेदी को भी विष्णुभोग चावल का पैकेट भेंट कर जिले की विशिष्ट कृषि उपज से परिचित कराया। इस दौरान जिले में संचालित महिला स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों, स्थानीय उत्पादों के विपणन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के प्रयासों की विस्तृत जानकारी भी साझा की गई।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में विष्णुभोग चावल को बढ़ावा देने की यह पहल प्रशासन, किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है बल्कि पारंपरिक कृषि विरासत को भी नई पहचान मिल रही है। आने वाले समय में विष्णुभोग चावल को राष्ट्रीय स्तर का ब्रांड बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास जिले के किसानों और महिला समूहों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकते हैं।