युद्ध के बीच क्यों गिर रहा सोना? 6 हफ्तों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट, जानिए वजह

वैश्विक तनाव बढ़ने के बावजूद सोने की कीमतों में गिरावट जारी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड छह हफ्तों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार तेल की कीमतों में तेजी, महंगाई की आशंका, ऊंची ब्याज दरों की संभावना और मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण सोने पर दबाव बना हुआ है।

Jul 18, 2026 - 17:49
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युद्ध के बीच क्यों गिर रहा सोना? 6 हफ्तों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट, जानिए वजह

UNITED NEWS OF ASIA. वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद इस बार सोने की कीमतों में अपेक्षित तेजी देखने को नहीं मिल रही है। इसके विपरीत अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना छह हफ्तों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है। आमतौर पर युद्ध या वैश्विक अनिश्चितता के समय निवेशक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने का रुख करते हैं, लेकिन इस बार बाजार की दिशा अलग नजर आ रही है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को स्पॉट गोल्ड लगभग 3,970 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया, जो जुलाई की शुरुआत के बाद का निचला स्तर है। सप्ताहभर में सोने की कीमतों में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी कमजोरी देखने को मिली।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने पर दबाव की सबसे बड़ी वजह तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी है। कच्चे तेल के महंगा होने से वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत हुई है। यदि महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है तो अमेरिका सहित दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकते हैं। यही संभावना फिलहाल सोने की कीमतों को प्रभावित कर रही है।

सोना ऐसा निवेश है जिस पर ब्याज नहीं मिलता। जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाते हैं या उन्हें लंबे समय तक ऊंचा रखने के संकेत देते हैं, तो निवेशक बेहतर रिटर्न के लिए सरकारी बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इससे सोने की मांग कमजोर पड़ती है और इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है।

बाजार विश्लेषकों का यह भी कहना है कि हालिया गिरावट में कुछ निवेशकों ने मुनाफावसूली भी की है। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी सोने की कीमतों को प्रभावित किया है। डॉलर मजबूत होने पर अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक मांग में कमी आ सकती है।

अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली मौद्रिक नीति बैठक पर टिकी है। निवेशकों का मानना है कि यदि महंगाई नियंत्रण में नहीं आती और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो फेड भविष्य में ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है या फिर बढ़ोतरी भी कर सकता है। ऐसे संकेत सोने की कीमतों के लिए निकट भविष्य में दबाव का कारण बन सकते हैं।

हालांकि लंबी अवधि को लेकर कई विशेषज्ञ अब भी सकारात्मक हैं। उनका मानना है कि यदि वैश्विक तनाव और बढ़ता है या आर्थिक अनिश्चितता गहराती है, तो निवेशक दोबारा सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर लौट सकते हैं। फिलहाल अन्य कीमती धातुओं जैसे चांदी, प्लैटिनम और पैलेडियम में भी कमजोरी का रुख देखने को मिल रहा है, जिससे स्पष्ट है कि मौजूदा समय में पूरा कीमती धातु बाजार दबाव में बना हुआ है।