योग अयोग्य को भी योग्य बनाता है, योग हमें वृद्ध नहीं होने देता: डॉ. वर्णिका शर्मा

परम जीवनम् फाउंडेशन द्वारा आयोजित योगासन कला प्रदर्शन एवं सम्मान समारोह में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि योग मन-शरीर के विकारों को दूर करने का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने बालमन की पवित्रता, योग की शक्ति और 7 से 77 वर्ष तक योग करने वालों के उत्साह की प्रशंसा की। कार्यक्रम में उत्कृष्ट योगसाधकों को सम्मानित भी किया गया।

Nov 27, 2025 - 12:23
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योग अयोग्य को भी योग्य बनाता है, योग हमें वृद्ध नहीं होने देता: डॉ. वर्णिका शर्मा

 UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर | परम जीवनम् फाउंडेशन द्वारा आयोजित योगासन कला प्रदर्शन एवं सम्मान समारोह में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुईं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. मनीषा सिंह, महेश तिवारी और योगाचार्य चूड़ामणि नायक शामिल रहे।

अपने उद्बोधन में डॉ. वर्णिका शर्मा ने योग की शक्ति को रेखांकित करते हुए कहा कि मन-मस्तिष्क के विकारों और शारीरिक कमजोरी को दूर करने का सबसे प्रभावी माध्यम योग है। उन्होंने कहा कि योग मनुष्यों को वृद्ध नहीं होने देता और अयोग्य को भी योग्य बनाने की क्षमता रखता है। उन्होंने बालमन की स्वच्छता और ऊर्जा को योग का वास्तविक स्वरूप बताते हुए योग को दैनिक जीवन में शामिल करने की अपील की।

फिल्मी अंदाज़ में “सभी विकारों और लाख दुखों की एक दवा—योग, काहे घबराए” कहते हुए उन्होंने लोगों को योग से जुड़े रहने का प्रेरक संदेश दिया।

डॉ. शर्मा ने बताया कि परम जीवनम् योग केंद्र में 7 वर्ष से लेकर 77 वर्ष तक के लोग योगाभ्यास कर रहे हैं और यह जानकर उन्हें अत्यंत हर्ष हुआ। उन्होंने योग केंद्र को हमेशा सक्रिय और जीवंत बनाए रखने की अपील की।

बच्चों में योग के प्रसार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि बच्चे स्वभाव से ही निर्मल और ऊर्जा से परिपूर्ण होते हैं, इसलिए वे योग के सबसे सुंदर प्रतिरूप हैं। योग उनके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास को और बेहतर बनाता है।

समारोह के अंत में मीणा बघेल, अजय साहू, अशोक सेठ, अनीता, ज्योति साहू और राधा सहित कई योगसाधकों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।