बालोद का औराटोला बना पहला लखपति दीदी ग्राम, महिलाओं की मेहनत से बदली तस्वीर
बालोद जिले के औराटोला गांव ने लखपति दीदी ग्राम बनकर नई मिसाल कायम की है, जहां स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने विविध आजीविका अपनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है।
UNITED NEWS OF ASIA. सुनील कुमार साहू, बालोद। बालोद जिले का छोटा सा गांव औराटोला आज पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है। यह गांव जिले का पहला “लखपति दीदी ग्राम” बनकर उभरा है, जहां स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने अपनी मेहनत और सरकारी योजनाओं के सही उपयोग से आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान योजना के तहत महिलाओं को विभिन्न आय आधारित गतिविधियों से जोड़ा गया, जिससे वे सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक की आय अर्जित करने में सक्षम हो सकें। बालोद जिले में अब तक 20 हजार 982 महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, जो इस योजना की सफलता को दर्शाता है।
“लखपति ग्राम” की अवधारणा का मुख्य उद्देश्य केवल गरीबी रेखा से ऊपर उठना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों को स्थायी और बहुआयामी आय के स्रोत उपलब्ध कराना है। इसके लिए महिलाओं को खेती के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, मशरूम उत्पादन, सिलाई और छोटे ग्रामीण उद्योगों से जोड़ा गया है।
औराटोला गांव की सफलता के पीछे महिलाओं की मेहनत और सही मार्गदर्शन की अहम भूमिका रही है। यहां की महिलाएं पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक और विविध आजीविका गतिविधियों को अपना रही हैं। उदाहरण के तौर पर कुमेश्वरी मसिया ने मत्स्य पालन और सब्जी उत्पादन को अपनाकर सालाना 1 लाख 17 हजार रुपये की आय अर्जित की है।
इसी तरह अटल महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष लाकेश्वरी दीदी और उनकी टीम ने फाइल पैड निर्माण का छोटा उद्योग शुरू किया। उन्होंने बैंक से ऋण लेकर अपनी यूनिट स्थापित की और स्थानीय बाजार व सरकारी कार्यालयों में उत्पाद बेचकर नियमित आय अर्जित कर रही हैं।
वहीं लोकेश्वरी साहू ने पशुपालन, सिलाई और मशरूम उत्पादन को मिलाकर एक सफल मॉडल तैयार किया है। उन्होंने उन्नत नस्ल की गायें खरीदीं, संतुलित आहार अपनाया और दूध से बने उत्पादों का भी निर्माण शुरू किया। आज उनकी वार्षिक आय 2 लाख 60 हजार रुपये से अधिक हो गई है।
इस पहल को सफल बनाने में जिला प्रशासन की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील कुमार चंद्रवंशी ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।
गांव के 65 परिवारों की महिलाएं इस योजना से जुड़कर लखपति दीदी बन चुकी हैं, जिसके बाद ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर औराटोला को “लखपति ग्राम” घोषित किया गया है।
यह पहल केवल आर्थिक बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण समाज में आत्मविश्वास और महिला नेतृत्व को भी मजबूत कर रही है। औराटोला आज पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक मॉडल बन चुका है, जहां से अन्य गांव प्रेरणा लेकर विकास की नई राह पर आगे बढ़ सकते हैं।