कबीरधाम में महिलाओं को मिल रहा व्यवसायिक सिलाई प्रशिक्षण, स्वरोजगार की ओर बढ़ रहे कदम
कबीरधाम जिले में महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए शाही एक्सपोर्ट संस्था द्वारा 35 स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को व्यवसायिक सिलाई प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को आधुनिक सिलाई, डिजाइनिंग और रेडीमेड वस्त्र निर्माण का कौशल सिखाया जा रहा है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l कबीरधाम जिले में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों और कलेक्टर गोपाल वर्मा के मार्गदर्शन में जिले में कई आजीविका आधारित गतिविधियों की शुरुआत की गई है। इसी कड़ी में जिला पंचायत की पहल पर बिहान योजना के तहत शाही एक्सपोर्ट संस्था द्वारा स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए व्यवसायिक सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 24 अप्रैल 2026 से शुरू किया गया है, जिसमें 45 दिवसीय प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक सिलाई और वस्त्र निर्माण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन जनपद पंचायत कवर्धा के सामुदायिक प्रशिक्षण केंद्र बिरकोना में किया जा रहा है। वर्तमान में प्रशिक्षण के पहले बैच में 35 समूहों की महिलाएं शामिल हैं।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को रोजगारपरक कौशल प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक सिलाई तकनीक, डिजाइनिंग, कटिंग, फिनिशिंग और बाजार की मांग के अनुसार रेडीमेड कपड़े तैयार करने की जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही महिलाओं को स्वरोजगार और आय वृद्धि के अवसरों से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अभिषेक अग्रवाल ने प्रशिक्षण केंद्र पहुंचकर कार्यक्रम का निरीक्षण किया और प्रतिभागियों से चर्चा कर प्रशिक्षण की गुणवत्ता की जानकारी ली। उन्होंने महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि इस प्रकार के कौशल विकास कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
संस्था की ओर से जानकारी दी गई कि इस योजना के तहत कुल एक हजार महिलाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इच्छुक महिलाओं को शाही एक्सपोर्ट संस्था द्वारा अपने विभिन्न केंद्रों में रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। संस्था के अनुसार चयनित महिलाओं को 15 हजार रुपए से अधिक का मानदेय दिया जा सकता है।
प्रशिक्षण में शामिल महिलाओं ने भी कार्यक्रम के प्रति उत्साह व्यक्त किया। प्रतिभागियों का कहना है कि यह प्रशिक्षण उनके लिए नए अवसरों के द्वार खोल रहा है और इससे वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी। ग्रामीण महिलाओं का मानना है कि सिलाई और वस्त्र निर्माण का यह कौशल उन्हें परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद करेगा।
बिहान योजना के अंतर्गत चलाए जा रहे ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है। जिला प्रशासन का मानना है कि इन प्रयासों से महिलाओं की आय में वृद्धि होगी और वे “लखपति दीदी” अभियान की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेंगी।
जिले में महिला समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार नए प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में ऐसे और भी कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकें।