बघमरा में अवैध रेत उत्खनन की शिकायत निकली निराधार, जांच में सब कुछ सामान्य

बालोद जिले के ग्राम बघमरा में अवैध रेत उत्खनन की शिकायत पर खनिज विभाग द्वारा की गई जांच में कोई भी अवैध गतिविधि नहीं पाई गई। ग्रामीण केवल घरेलू उपयोग के लिए सीमित मात्रा में रेत का उपयोग कर रहे हैं।

Apr 30, 2026 - 14:20
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बघमरा में अवैध रेत उत्खनन की शिकायत निकली निराधार, जांच में सब कुछ सामान्य

UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l जिला बालोद के ग्राम बघमरा में रेत खदान को लेकर सामने आई अवैध उत्खनन की शिकायत पर खनिज विभाग द्वारा की गई जांच में महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। जिला जनसम्पर्क कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह शिकायत पूरी तरह निराधार पाई गई है और मौके पर किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि नहीं देखी गई।

खनिज विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की और जिला खनि अधिकारी प्रवीण चन्द्राकर के निर्देशन में जांच टीम को मौके पर भेजा गया। जांच के दौरान वार्ड क्रमांक 01 के पार्षद पोषण निषाद सहित अन्य ग्रामीणजन भी उपस्थित रहे, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रही। अधिकारियों ने खदान क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण किया और यह सुनिश्चित किया कि वहां किसी प्रकार का अवैध उत्खनन तो नहीं हो रहा है।

जांच के दौरान यह स्पष्ट रूप से पाया गया कि खदान में वर्तमान समय में किसी भी प्रकार का उत्खनन कार्य नहीं हो रहा है और क्षेत्र पूरी तरह शांत है। इससे यह साबित हुआ कि अवैध रेत खनन की जो शिकायत की गई थी, वह तथ्यों पर आधारित नहीं थी। इस निष्कर्ष ने न केवल ग्रामीणों को राहत दी है, बल्कि प्रशासन की निष्पक्षता और तत्परता को भी दर्शाया है।

पार्षद पोषण निषाद ने भी इस संबंध में स्पष्ट किया कि उन्हें गांव में किसी प्रकार के अवैध उत्खनन की जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि ग्रामवासी समय-समय पर अपने निजी कार्यों जैसे घर निर्माण या मरम्मत के लिए सीमित मात्रा में रेत का उपयोग करते हैं। यह उपयोग पूरी तरह व्यक्तिगत और गैर-व्यावसायिक होता है, जिसका किसी प्रकार के अवैध व्यापार से कोई संबंध नहीं है।

खनिज विभाग ने इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में कोई व्यक्ति रेत का उत्खनन कर उसे गांव से बाहर बिक्री के लिए ले जाता है या व्यावसायिक उपयोग करता है, तो इसकी जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों को दी जानी चाहिए। इससे समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी और किसी भी अवैध गतिविधि को रोका जा सकेगा।

यह पूरा मामला इस बात का उदाहरण है कि प्रशासन किसी भी शिकायत को गंभीरता से लेता है और उसकी निष्पक्ष जांच करता है। साथ ही, यह भी स्पष्ट होता है कि बिना पूरी जानकारी के अफवाहें फैलाना उचित नहीं है, क्योंकि इससे अनावश्यक भ्रम और तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

अंततः, बघमरा गांव में हुई इस जांच ने यह सिद्ध कर दिया है कि वहां किसी भी प्रकार का अवैध रेत उत्खनन नहीं हो रहा है। ग्रामीण अपने आवश्यक कार्यों के लिए सीमित संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं, जो पूरी तरह वैध है। प्रशासन और जनता के बीच बेहतर समन्वय और पारदर्शिता से ही इस प्रकार की स्थितियों को प्रभावी ढंग से संभाला जा सकता है।