धमतरी जिले में अब तक 427.4 मिमी औसत वर्षा दर्ज, मगरलोड में सामान्य के मुकाबले सर्वाधिक बारिश
धमतरी जिले में 1 जून से 27 जुलाई 2026 तक 427.4 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले 10 वर्षों की औसत का 85.5 प्रतिशत है। मगरलोड तहसील में सामान्य के मुकाबले 99.4 प्रतिशत वर्षा दर्ज होने के साथ सबसे अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l जिले में मानसून की गतिविधियां लगातार जारी हैं और अधिकांश क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की जा रही है। भू-अभिलेख शाखा से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 27 जुलाई 2026 को जिले में औसतन 19.1 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। वहीं 1 जून से 27 जुलाई 2026 तक जिले में कुल 427.4 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज हुई है। यह पिछले 10 वर्षों की इसी अवधि की औसत 500.0 मिलीमीटर वर्षा का लगभग 85.5 प्रतिशत है।
जिले की विभिन्न तहसीलों में वर्षा का वितरण अलग-अलग रहा। 27 जुलाई को धमतरी तहसील में 31.9 मिमी, कुरूद में 11.9 मिमी, मगरलोड में 11.3 मिमी, भखारा में 37.4 मिमी, नगरी में 5.9 मिमी, कुकरेल में 28.0 मिमी तथा बेलरगांव में 7.0 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले के अधिकांश क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधियां बनी हुई हैं, जिससे खरीफ फसलों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार हो रही हैं।
संचयी वर्षा के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 जून से अब तक कुकरेल तहसील में सबसे अधिक 483.0 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। इसके बाद मगरलोड में 471.7 मिमी, धमतरी में 459.7 मिमी, भखारा में 454.5 मिमी, कुरूद में 409.1 मिमी, बेलरगांव में 389.6 मिमी तथा नगरी तहसील में 324.4 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
यदि पिछले 10 वर्षों की औसत वर्षा से तुलना की जाए तो मगरलोड तहसील सबसे आगे रही है, जहां सामान्य वर्षा का 99.4 प्रतिशत रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा कुकरेल में 93.0 प्रतिशत, भखारा में 90.3 प्रतिशत, धमतरी में 86.4 प्रतिशत, कुरूद में 84.7 प्रतिशत, बेलरगांव में 80.6 प्रतिशत तथा नगरी तहसील में 64.3 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि जिले के अधिकांश हिस्सों में सामान्य के अनुरूप या उसके करीब वर्षा हुई है, जबकि नगरी क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम बारिश दर्ज की गई है।
मानसून की सक्रियता को देखते हुए जिला प्रशासन लगातार वर्षा की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम विभाग और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार खेती-किसानी के कार्य करें। साथ ही खेतों में जल निकासी, फसल संरक्षण तथा अन्य कृषि गतिविधियों में आवश्यक सावधानी बरतें ताकि अत्यधिक वर्षा या मौसम में अचानक बदलाव की स्थिति में फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।
जिला प्रशासन का कहना है कि मानसून की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे ताकि किसानों और आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। वर्तमान वर्षा से जिले में जलस्रोतों के भरने और खरीफ फसलों को पर्याप्त नमी मिलने की उम्मीद भी बढ़ी है।