धमतरी में नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को 20 साल के सश्रम कारावास की सजा, पॉक्सो एक्ट में अदालत का फैसला

धमतरी के एक पॉक्सो मामले में अदालत ने नाबालिग के अपहरण और लैंगिक अपराध के आरोपी कोमल लहरे को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। पुलिस की प्रभावी विवेचना और सशक्त साक्ष्यों के आधार पर यह फैसला आया। मामले की विवेचना करने वाले तत्कालीन विवेचना अधिकारी को पुरस्कृत करने की घोषणा की गई है।

Jul 18, 2026 - 17:24
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धमतरी में नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को 20 साल के सश्रम कारावास की सजा, पॉक्सो एक्ट में अदालत का फैसला

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l धमतरी जिले में नाबालिग से लैंगिक अपराध के एक मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीएससी), धमतरी की अदालत ने सुनाया। पुलिस के अनुसार प्रभावी विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्यों और मजबूत न्यायालयीन पक्ष प्रस्तुत किए जाने के कारण आरोपी को कठोर दंड मिला।

यह मामला चौकी बिरेझर, थाना कुरूद में वर्ष 2024 में दर्ज अपराध क्रमांक 199/2024 से संबंधित है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान पुलिस टीम ने लगातार पतासाजी, तकनीकी विश्लेषण और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पीड़ित नाबालिग को सकुशल बरामद किया।

जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर आरोपी कोमल लहरे, निवासी मोहदा, जिला दुर्ग के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराएं 363, 366, 376(2)(जे)(एन) तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 की धारा 6 के तहत आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के तहत सात वर्ष का सश्रम कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड, धारा 366 के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास और तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय के आदेशानुसार अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान रहेगा।

धमतरी पुलिस ने इस निर्णय को महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों के मामलों में प्रभावी जांच और त्वरित न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। पुलिस का कहना है कि विवेचना के दौरान वैज्ञानिक साक्ष्य, तकनीकी विश्लेषण और कानूनी प्रक्रिया का पूरी गंभीरता से पालन किया गया, जिससे अभियोजन पक्ष न्यायालय में मजबूत मामला प्रस्तुत कर सका।

मामले की सफल विवेचना के लिए पुलिस अधीक्षक भावना पांडेय ने तत्कालीन विवेचना अधिकारी निरीक्षक चंद्रकांत साहू के कार्य की सराहना करते हुए उन्हें पुरस्कृत करने की घोषणा की है।

धमतरी पुलिस ने कहा है कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों के मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति के तहत कार्य किया जा रहा है। ऐसे मामलों में त्वरित, निष्पक्ष और प्रभावी विवेचना सुनिश्चित कर दोषियों को कानून के अनुसार सख्त सजा दिलाने के लिए पुलिस लगातार प्रतिबद्ध है।