प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि नीलगाय का शिकार तीर से किया गया है। उसके गर्दन, पेट और पिछले हिस्से में तीर के निशान पाए गए, जिससे यह साफ हो गया कि यह मामला प्राकृतिक मृत्यु का नहीं, बल्कि अवैध शिकार का है।
घटना की सूचना मिलते ही वन परिक्षेत्र अधिकारी और वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से विशेष डॉग स्कॉड को बुलाया गया।
डॉग स्कॉड ने घटनास्थल से मिले तीर की गंध के आधार पर संदिग्धों की तलाश शुरू की। सूंघने की प्रक्रिया के दौरान डॉग स्कॉड सीधे ग्राम डोकाल पहुंचा और आरोपी मन्नू (पिता लहर सिंह) के घर तक पहुंचकर उसे चिन्हित किया। इसके बाद वन विभाग ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसके खिलाफ शिकार में संलिप्तता के पुख्ता सबूत मिले।
वन विभाग ने आरोपी मन्नू सहित अन्य संभावित आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। साथ ही आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।
डीएफओ धमतरी ने बताया कि वन्यप्राणियों के अवैध शिकार को रोकने के लिए विभाग लगातार सतर्क है। इसके लिए उड़नदस्ता स्ट्राइक फोर्स, गुप्तचर तंत्र और नियमित निगरानी की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस तरह के अपराधों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वन विभाग ने आम नागरिकों और ग्रामीणों से भी अपील की है कि यदि कहीं भी वन अपराध या शिकार से संबंधित गतिविधि दिखाई दे, तो उसकी सूचना तुरंत विभाग को दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और शासन द्वारा प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी।
वन अपराध से संबंधित जानकारी देने के लिए वनमंडलाधिकारी कार्यालय के दूरभाष नंबर 07722-238371 पर संपर्क किया जा सकता है।
यह घटना एक बार फिर यह संकेत देती है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए प्रशासन के साथ-साथ आम जनता की भागीदारी भी अत्यंत आवश्यक है। जागरूकता और सतर्कता के जरिए ही ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।