बालोद में तांदुला कॉम्प्लेक्स मॉडल प्रदर्शनी का शुभारंभ, कलेक्टर ने किया अवलोकन

बालोद जिले में तांदुला कॉम्प्लेक्स मॉडल प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। इस मॉडल के माध्यम से जिले की सिंचाई परियोजनाओं और जल प्रबंधन प्रणाली को सरल रूप में दर्शाया गया है।

Jun 15, 2026 - 18:21
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बालोद में तांदुला कॉम्प्लेक्स मॉडल प्रदर्शनी का शुभारंभ, कलेक्टर ने किया अवलोकन

UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l बालोद जिले में जल संसाधन और सिंचाई व्यवस्था की जानकारी को आमजन तक सरल एवं सुलभ रूप में पहुंचाने के उद्देश्य से संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में तांदुला कॉम्प्लेक्स मॉडल प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। इस प्रदर्शनी का शुभारंभ कलेक्टर द्वारा जिला स्तरीय अधिकारियों की उपस्थिति में विधिवत पूजा-अर्चना कर किया गया।

यह मॉडल प्रदर्शनी जिले की विशाल सिंचाई परियोजनाओं और जल प्रबंधन प्रणाली का सजीव एवं विस्तृत दृश्य प्रस्तुत करती है, जिससे आम नागरिक आसानी से समझ सकते हैं कि जिले में जल वितरण और सिंचाई व्यवस्था किस प्रकार संचालित होती है।

प्रदर्शनी में तांदुला जलाशय, गोंदली जलाशय और खरखरा जलाशय की भौगोलिक स्थिति को अत्यंत सूक्ष्मता के साथ दर्शाया गया है। इसके साथ ही गंगरेल बांध से नहरों के माध्यम से जल प्रवाह की पूरी प्रक्रिया को भी मॉडल में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया गया है।

मॉडल में यह भी दिखाया गया है कि किस प्रकार जल संसाधनों का उपयोग दुर्ग और बेमेतरा जिलों में सिंचाई के लिए किया जाता है तथा तालाबों को भरने की व्यवस्था कैसे की जाती है। इसके अलावा भिलाई स्टील प्लांट को जल आपूर्ति की प्रक्रिया को भी इस मॉडल में शामिल किया गया है।

प्रदर्शनी में सभी प्रमुख जलाशयों के निर्माण वर्ष और उनकी जल भराव क्षमता का विस्तृत उल्लेख किया गया है, जिससे विद्यार्थियों, किसानों और आम नागरिकों को जल संसाधनों के महत्व को समझने में आसानी हो।

इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर तथा जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अधिकारियों ने इस मॉडल को एक ज्ञानवर्धक पहल बताते हुए कहा कि इससे न केवल प्रशासनिक योजनाओं की पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि आमजन में जल संरक्षण और संसाधन प्रबंधन के प्रति जागरूकता भी विकसित होगी।

कलेक्टर ने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनी नागरिकों को जिले की विकास योजनाओं को समझने में मदद करती है और जल प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर जनभागीदारी को बढ़ावा देती है।