एम्स रायपुर में पीजी छात्रों के लिए शोध अभिविन्यास कार्यशाला, भविष्य के वैज्ञानिकों को किया सशक्त

एम्स रायपुर में 10-11 मार्च 2026 को दो दिवसीय स्नातकोत्तर अनुसंधान अभिविन्यास कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य पीजी छात्रों को आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान, नैतिक शोध पद्धतियों और वैज्ञानिक लेखन के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करना था।

Mar 15, 2026 - 13:14
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एम्स रायपुर में पीजी छात्रों के लिए शोध अभिविन्यास कार्यशाला, भविष्य के वैज्ञानिकों को किया सशक्त

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर । All India Institute of Medical Sciences Raipur में 10-11 मार्च 2026 को आयोजित दो दिवसीय स्नातकोत्तर अनुसंधान अभिविन्यास कार्यशाला (Post Graduate Research Orientation Workshop) का सफलतापूर्वक समापन हुआ। संस्थान के रिसर्च सेल द्वारा आयोजित इस पहल का उद्देश्य नैदानिक अभ्यास और वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच की खाई को पाटना था, ताकि स्नातकोत्तर छात्रों को आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान और शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए आवश्यक कौशल प्रदान किए जा सकें।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में संस्थान के वरिष्ठ नेतृत्व ने चिकित्सा शिक्षा में अनुसंधान के महत्व पर प्रकाश डाला। अनुसंधान की एसोसिएट डीन डॉ. एकता खंडेलवाल और अनुसंधान की डीन डॉ. अभिरुचि गल्होत्रा ने व्यवस्थित शोध पद्धतियों और साक्ष्य-आधारित कार्य की भूमिका को रेखांकित किया। वहीं अकादमिक डीन डॉ. एली महापात्रा ने छात्रों को याद दिलाया कि थीसिस केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और समय पर शोध जमा करना परीक्षा पात्रता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

कार्यशाला को संस्थान के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) से विशेष प्रोत्साहन मिला। अपने संबोधन में उन्होंने छात्रों को कक्षा से आगे बढ़कर सोचने और ऐसे नैतिक व नवाचारी शोध करने के लिए प्रेरित किया, जो वास्तविक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान कर सके और राष्ट्रीय स्तर पर रोगी परिणामों में सुधार ला सके।

दो दिनों तक चले इस कार्यक्रम में संकाय विशेषज्ञों ने अनुसंधान प्रक्रिया की तकनीकी बारीकियों पर विस्तृत सत्र लिए। छात्रों को साहित्य खोज रणनीतियों, मजबूत अनुसंधान परिकल्पनाओं के निर्माण और सटीक डेटा संग्रह उपकरणों के विकास के बारे में मार्गदर्शन दिया गया।

कार्यशाला में आधुनिक चुनौतियों और प्रगतियों को ध्यान में रखते हुए शोध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नैतिक उपयोग, साहित्यिक चोरी (Plagiarism) के प्रति जागरूकता और संदर्भ प्रबंधन (Reference Management) जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी शामिल किया गया।

मेडिकल रेजिडेंसी के अत्यधिक दबाव को ध्यान में रखते हुए कार्यशाला में तनाव प्रबंधन पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। इस समग्र दृष्टिकोण से छात्रों को न केवल उच्च गुणवत्ता वाले शोध प्रोटोकॉल और शैक्षणिक दस्तावेज़ तैयार करने का तकनीकी आधार मिला, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक शोध में दीर्घकालिक करियर के लिए आवश्यक मानसिक स्वास्थ्य सहयोग भी प्राप्त हुआ।

यह पहल एम्स रायपुर की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिसके तहत संस्थान भविष्य के चिकित्सकों और वैज्ञानिकों को सशक्त बनाने के लिए अनुसंधान-आधारित शिक्षा को बढ़ावा दे रहा है।