सरायपाली में सादगी और अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, इमाम हुसैन की कुर्बानी को किया याद

महासमुंद जिले के सरायपाली में मोहर्रम का पर्व श्रद्धा, सादगी और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। मुस्लिम समाज ने हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को याद करते हुए विशेष नमाज, कुरआन ख्वानी, जिक्रे शोहदाए कर्बला और शाही ताजिया कार्यक्रम आयोजित किए। ताजिया में सभी समाजों के लोगों ने शामिल होकर अमन-चैन और भाईचारे की दुआ मांगी।

Jun 28, 2026 - 10:36
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सरायपाली में सादगी और अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, इमाम हुसैन की कुर्बानी को किया याद

UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुन्द l महासमुंद जिले के सरायपाली नगर में मोहर्रम का पर्व पूरी श्रद्धा, सादगी और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुस्लिम समाज ने हजरत मोहम्मद साहब के नवासे एवं हजरत अली के सुपुत्र हजरत इमाम हुसैन तथा उनके पूरे परिवार और 72 साथियों की कर्बला के मैदान में हक और इंसाफ के लिए दी गई महान कुर्बानी को याद किया। मोहर्रम के अवसर पर बनाए गए शाही ताजिया में मुस्लिम समाज के साथ-साथ अन्य समाज के लोगों ने भी श्रद्धापूर्वक माथा टेककर प्रदेश, देश और पूरी दुनिया में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी।

मुस्लिम जमात सरायपाली के अध्यक्ष शाहिद खान ने बताया कि आज से लगभग 1400 वर्ष पूर्व दसवीं मोहर्रम के दिन कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन एवं उनके 72 साथियों ने सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए अपनी शहादत दी थी। यह बलिदान पूरी मानवता के लिए त्याग, साहस और सत्य के मार्ग पर अडिग रहने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि इसी कारण विश्वभर के मुस्लिम समुदाय के लोग मोहर्रम के पहले दस दिनों तक इमाम हुसैन की याद में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं तथा उनके बताए हुए रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं।

उन्होंने बताया कि इस्लामिक नए वर्ष की शुरुआत भी इसी पवित्र माह से होती है। दसवीं मोहर्रम अर्थात आशुरा के दिन सुबह लगभग 9:30 बजे मस्जिद में विशेष नमाज अदा की गई। नमाज के बाद पूरे मुल्क में शांति, भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई। इसके पश्चात मुस्लिम समाज के लोगों ने कब्रिस्तान पहुंचकर कुरआन शरीफ की तिलावत की, फातिहा पढ़ी और अपने मरहूमों को याद करते हुए उनके लिए मगफिरत की दुआ मांगी।

दोपहर के समय मदरसा निजामिया में जिक्रे शोहदाए कर्बला की विशेष महफिल आयोजित की गई। इस अवसर पर पाटन, जबलपुर से पधारे मेहमान हजरत अल्लामा मुफ्ती इरशादुल कादरी अजहरी ने हजरत इमाम हुसैन के जीवन, उनके त्याग, संघर्ष और शहादत पर विस्तार से तकरीर की। उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश केवल मुसलमानों के लिए नहीं बल्कि पूरी इंसानियत के लिए है। सत्य और न्याय की रक्षा के लिए किसी भी परिस्थिति में पीछे नहीं हटना ही इमाम हुसैन की सबसे बड़ी शिक्षा है।

उल्लेखनीय है कि यह धार्मिक कार्यक्रम केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पिछले दस दिनों से प्रतिदिन रात्रि के समय मदरसा निजामिया में धार्मिक आयोजन, तकरीर और जिक्र का सिलसिला जारी था, जिसका समापन दसवीं मोहर्रम को हुआ। इस दौरान मौलाना अब्दुस्सत्तार अशरफी भी लगातार उपस्थित रहे और उन्होंने समाज को धार्मिक एवं नैतिक मूल्यों का संदेश दिया।

मोहर्रम के अवसर पर महिलाओं ने भी धार्मिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। रहनुमा कमेटी की अध्यक्ष आबिदा खानम के नेतृत्व में समाज की महिलाओं द्वारा लगातार दस दिनों तक मदरसा निजामिया में कुरआन ख्वानी का आयोजन किया गया। महिलाओं ने हजरत इमाम हुसैन और शोहदाए कर्बला की याद में दुआएं कीं तथा समाज में शांति, भाईचारा और खुशहाली की कामना की।

संपूर्ण धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में मुस्लिम जमात सरायपाली के अध्यक्ष शाहिद खान सहित असफाक खान, रफीक उल्ला खान, डॉ. शाहजहाँ, शेख नकीब, मो. अख्तर, मो. गुलाम दस्तगीर, मजहर खान, सफीकउल्ला खान, मुस्तफीज आलम, मो. इकबाल, इमरान मेमन, मतहर अली, मुजाहिद खान, जुनैद खान, मो. रहमत खान सहित समाज के अनेक सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मोहर्रम के अवसर पर पूर्व विधायक देवेन्द्र बहादुर सिंह भी अपने पुत्र कुमार आदित्येन्द्र बहादुर सिंह एवं भतीजे यशवेन्द्र बहादुर सिंह के साथ मदरसा निजामिया पहुंचे। उन्होंने शाही ताजिया पर श्रद्धापूर्वक माथा टेका और नारियल चढ़ाकर सरायपाली, बसना क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में अमन-चैन, सौहार्द और खुशहाली की दुआ मांगी। इस दौरान उन्होंने मुस्लिम समाज के लोगों से मुलाकात कर सामाजिक सौहार्द, भाईचारे और क्षेत्र के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा भी की।

इस अवसर पर कांग्रेस नेता अब्दुल नईम लखानी, विजय साहू, टिकेश्वर पटेल, बाबू भाई जमील हुसैन, जनाब खान, इसराइल खान, तबारक हुसैन, अय्युब हुसैन, कय्युम हुसैन, शहादत हुसैन, मुकीम हुसैन, आबिद हुसैन, मो. जाहिद रजा, आफताब हुसैन, फारूख हुसैन, शकील हुसैन, अल्ताफ हुसैन, अनीस हुसैन, अल्जार हुसैन, अरबाज हुसैन, अन्शाद हुसैन, अजमल हुसैन, अजमत हुसैन, अल्काश हुसैन, मो. शहीर सहित बड़ी संख्या में सामाजिक जन उपस्थित रहे।

ज्ञात हो कि विगत कई वर्षों से राजमहल सरायपाली की ओर से मुजावर अय्यूब हुसैन एवं उनके परिवार द्वारा प्रतिवर्ष स्वर्गीय वीरेन्द्र बहादुर सिंह और स्वर्गीय महेन्द्र बहादुर सिंह की स्मृति में जुड़वां शाही ताजिया तैयार किया जाता है। यह परंपरा आज भी समाज में आपसी भाईचारे, सांप्रदायिक सौहार्द और धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी हुई है। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में लोगों ने ताजिया के दर्शन कर प्रदेश और देश में शांति, सद्भाव और खुशहाली की दुआ मांगी। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, आपसी प्रेम और सामाजिक एकता का प्रेरणादायी वातावरण देखने को मिला।