डोंगरगढ़ के कल्याणपुर में अनोखा विरोध: अवैध शराब से त्रस्त ग्रामीणों ने सरकारी दुकान खोलने की उठाई मांग
राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ ब्लॉक के ग्राम कल्याणपुर में अवैध शराब बिक्री से परेशान ग्रामीणों ने अनोखा विरोध जताया है। शराब बंद कराने की बजाय अब ग्रामीणों ने गांव में ही शासकीय शराब दुकान खोलने की मांग की है, ताकि अवैध कारोबार पर रोक लग सके। इस मांग को लेकर ग्रामीणों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा और जल्द कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
UNITED NEWS OF ASIA. नेमिश अग्रवाल, राजनंदगांव l राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम कल्याणपुर में अवैध शराब की समस्या को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब एक अनोखे विरोध के रूप में सामने आया है। आमतौर पर जहां लोग शराब दुकानों को बंद कराने की मांग करते हैं, वहीं कल्याणपुर के ग्रामीणों ने इसके उलट गांव में शासकीय शराब दुकान खोलने की मांग उठाई है। उनका मानना है कि इससे अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
ग्राम कल्याणपुर के ग्रामीण लंबे समय से गांव में अवैध शराब बिक्री से परेशान हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई वर्षों से यह अवैध गतिविधि लगातार चल रही है और इसकी शिकायत प्रशासन से कई बार की जा चुकी है। बावजूद इसके प्रशासन की कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित रही, जिससे अवैध कारोबार पर कोई ठोस असर नहीं पड़ा। इसी कारण ग्रामीणों में नाराजगी लगातार बढ़ती गई।
प्रशासनिक उदासीनता से आक्रोशित ग्रामीणों ने ग्राम सभा की बैठक आयोजित की, जिसमें सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव में गांव में शासकीय शराब दुकान खोलने की मांग की गई। ग्रामीणों का तर्क है कि जब सरकार द्वारा नियंत्रित शराब दुकान खुलेगी, तो अवैध रूप से शराब बेचने वालों की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा और उनका नेटवर्क स्वतः कमजोर हो जाएगा।
ग्राम सभा के निर्णय के बाद ग्रामीणों ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए शासकीय शराब दुकान के लिए गांव में भूमि भी चिन्हांकित कर दी। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण डोंगरगढ़ एसडीएम कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री, आबकारी मंत्री, जिला कलेक्टर एवं एसडीएम के नाम ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध शराब के कारण गांव में सामाजिक और आर्थिक समस्याएं बढ़ रही हैं। कई परिवार इससे प्रभावित हो रहे हैं और युवाओं में नशे की लत तेजी से फैल रही है। ऐसे में यदि शासकीय दुकान खुलेगी तो शराब की बिक्री नियंत्रित होगी और अवैध धंधे पर लगाम लगेगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उनका कहना है कि यह कदम उन्होंने मजबूरी में उठाया है, क्योंकि बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया।
यह मामला प्रशासन के लिए एक चुनौती बन गया है, क्योंकि एक ओर जहां शराबबंदी और नशामुक्ति की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण खुद सरकारी शराब दुकान खोलने की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस अनोखे विरोध और मांग पर क्या रुख अपनाता है।