वनांचल में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था: बोराई सिविल अस्पताल बना नाम मात्र का केंद्र
नगरी क्षेत्र के बोराई सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं गंभीर रूप से प्रभावित हैं। डॉक्टरों की कमी, अनियमित सेवाएं और अव्यवस्थित व्यवस्था के कारण ग्रामीणों को इलाज के लिए अन्य स्थानों पर जाना पड़ रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन l छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र नगरी अंतर्गत बोराई का सिविल अस्पताल आज खुद ही बीमार नजर आ रहा है। करीब पांच साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा इस स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अस्पताल के रूप में उन्नत किया गया था। उस समय ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं अपने क्षेत्र में ही मिल सकेंगी, लेकिन वर्तमान स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत है।
बोराई सिविल अस्पताल में 18 पद स्वीकृत किए गए थे, लेकिन आज यहां आवश्यक स्टाफ और सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है। अस्पताल 24 घंटे संचालित होना चाहिए, लेकिन हकीकत यह है कि यहां रात के समय केवल एक आरएमए ऑन-कॉल ड्यूटी पर रहता है। ग्रामीणों के अनुसार, वह भी अस्पताल में उपस्थित न रहकर विश्रामपुरी में रहता है, जिससे आपात स्थिति में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता।
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी स्थिति में वे अस्पताल जाने के बजाय सीधे अन्य अस्पतालों का रुख करते हैं। दिन के समय भी अस्पताल की व्यवस्था स्थिर नहीं है। यहां स्थायी डॉक्टर की कमी के कारण सिहावा, सांकरा और दुगली से डॉक्टरों को अस्थायी रूप से भेजा जाता है। इससे मरीजों को लगातार एक ही डॉक्टर से उपचार नहीं मिल पाता और उन्हें बार-बार परेशानी झेलनी पड़ती है।
ग्रामीण माखन सलाम, सोनराज वट्टी, राजेश सामरथ सहित कई लोगों ने बताया कि जब भी वे अस्पताल जाते हैं, हर बार नया डॉक्टर मिलता है। यदि किसी डॉक्टर को दोबारा दिखाना हो, तो बताया जाता है कि उनकी ड्यूटी एक महीने बाद लगेगी। इस स्थिति के कारण लोगों का अस्पताल पर भरोसा कम होता जा रहा है।
दूसरी ओर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सांकरा में एक मेडिकल ऑफिसर और तीन आरएमए पदस्थ हैं, जबकि वहां मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। इसके विपरीत बोराई सिविल अस्पताल में न तो कोई स्थायी मेडिकल ऑफिसर है और न ही पर्याप्त स्टाफ। इससे यह स्पष्ट होता है कि संसाधनों का संतुलित वितरण नहीं हो पा रहा है।
यह क्षेत्र पहले नक्सल प्रभावित रहा है, लेकिन अब पूरा धमतरी जिला नक्सलमुक्त हो चुका है। इसके बावजूद स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार नहीं होना चिंता का विषय है। स्टाफ क्वार्टर की कमी और आवासीय सुविधाओं के अभाव को एक कारण बताया जा रहा है, लेकिन इसके समाधान के लिए भी ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्टाफ क्वार्टर के लिए प्रस्ताव भेजा गया है और एक डॉक्टर की ड्यूटी प्रतिदिन लगाई जा रही है। वहीं एक मेडिकल ऑफिसर के पीजी कोर्स से लौटने के बाद स्थिति सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जिले के भीतर उपलब्ध अधिकारों का उपयोग कर स्थायी रूप से डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए। उनका कहना है कि अस्थायी व्यवस्था से समस्या का समाधान संभव नहीं है।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य मनोज साक्षी ने बताया कि पहले भी इस मुद्दे को लेकर चक्काजाम किया गया था, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो ग्रामीण फिर से आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
कुल मिलाकर, बोराई सिविल अस्पताल की स्थिति यह दर्शाती है कि वनांचल क्षेत्र के ग्रामीण आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं। समय रहते ठोस कदम उठाना आवश्यक है, ताकि लोगों को उनके अधिकार के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।