शिक्षक विहीन स्कूल में स्वीपर करा रहे पढ़ाई, कांग्रेस ने उठाए शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

छत्तीसगढ़ के सरसींवा क्षेत्र के एक प्राथमिक स्कूल में शिक्षक की अनुपस्थिति में स्वीपर द्वारा पढ़ाई कराने का मामला सामने आया है। कांग्रेस ने इसे शिक्षा व्यवस्था की विफलता बताते हुए सरकार और शिक्षा मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

Apr 14, 2026 - 13:51
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शिक्षक विहीन स्कूल में स्वीपर करा रहे पढ़ाई, कांग्रेस ने उठाए शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

UNITED NEWS OF ASIA . अम्र्रितेश्वर सिंह, रायपुर l  छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्कूलों की स्थिति पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सरसींवा वन क्षेत्र के रनकोट स्थित एक प्राथमिक शाला में शिक्षक के अभाव में स्वीपर द्वारा बच्चों को पढ़ाने और परीक्षा लेने की बात सामने आई है। इस घटना को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने इस मामले को शिक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने विधानसभा में गलत जानकारी दी थी कि प्रदेश में कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं है।

धनंजय सिंह ठाकुर ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब मंत्री ने ऐसा दावा किया था, तो फिर रनकोट स्कूल में स्वीपर द्वारा पढ़ाई कराने की स्थिति कैसे उत्पन्न हुई? उन्होंने कहा कि यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि यह दर्शाता है कि जमीनी हकीकत और सरकारी दावों में बड़ा अंतर है।

उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल में शिक्षक नहीं होने की जानकारी स्थानीय अधिकारियों—जैसे डीओ और बीओ—को पहले से थी, इसके बावजूद पूरे साल कोई नियुक्ति नहीं की गई। ग्रामीण लगातार शिक्षक की मांग करते रहे, लेकिन उनकी मांग को नजरअंदाज किया गया।

कांग्रेस प्रवक्ता ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि संभवतः शिक्षा मंत्री को भी गलत जानकारी दी गई हो, जिसकी जांच आवश्यक है।

प्रदेश में शिक्षकों की कमी को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। धनंजय सिंह ठाकुर के अनुसार, वर्तमान में राज्य में 60 हजार से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त हैं। कई स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जबकि पिछले ढाई वर्षों में शिक्षकों की कोई बड़ी भर्ती नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि इस दौरान कई शिक्षक सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि स्कूलों में गैर-शिक्षकीय कर्मचारी बच्चों को पढ़ाने के लिए मजबूर हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है।

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की नीति के कारण बड़ी संख्या में स्कूल बंद हो चुके हैं। उनका दावा है कि पिछले ढाई वर्षों में लगभग 10,500 स्कूल बंद किए गए हैं, जो चिंताजनक है।

अंत में धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि शिक्षा मंत्री को राजनीतिक बयानबाजी से हटकर शिक्षा व्यवस्था को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने मांग की कि जल्द से जल्द शिक्षकों की भर्ती कर स्कूलों में उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में सुधार के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।