डिजिटल इंडिया की खुली पोल: पंचायत भवन में अंधेरा, अधिकारियों को निजी घर में लगाना पड़ा शिविर

बलरामपुर जिले के चंद्रनगर पंचायत में आयोजित राजस्व पखवाड़ा शिविर अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गया। पंचायत भवन में बिजली, इंटरनेट और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के चलते अधिकारियों को पूर्व उपसरपंच के घर में स्टाल लगाना पड़ा, जिससे ‘डिजिटल इंडिया’ के दावों पर सवाल उठ रहे हैं।

Apr 4, 2026 - 18:10
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डिजिटल इंडिया की खुली पोल: पंचायत भवन में अंधेरा, अधिकारियों को निजी घर में लगाना पड़ा शिविर

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान बलरामपुर। केंद्र और राज्य सरकार जहां एक ओर ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘सुशासन’ के बड़े-बड़े दावे कर रही हैं, वहीं बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चंद्रनगर से सामने आई तस्वीरें इन दावों की हकीकत बयां कर रही हैं। यहां आयोजित ‘राजस्व पखवाड़ा शिविर’ पूरी तरह अव्यवस्थाओं का शिकार हो गया, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

दरअसल, राजस्व पखवाड़ा के तहत कृषि विभाग, राजस्व विभाग (पटवारी) और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को एक ही स्थान पर बैठकर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करना था। इसके लिए पंचायत भवन को केंद्र बनाया गया था, लेकिन विडंबना यह रही कि जिस भवन को डिजिटल सेवाओं का केंद्र होना चाहिए था, वहां न बिजली की सुविधा थी, न इंटरनेट और न ही बैठने की समुचित व्यवस्था।

स्थिति इतनी खराब हो गई कि जैसे ही बिजली गुल हुई, पूरे शिविर का कामकाज ठप पड़ गया। ऑनलाइन सेवाएं पूरी तरह बाधित हो गईं और दूर-दराज से आए ग्रामीणों को घंटों इंतजार करना पड़ा। अंततः मजबूर होकर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAO) को अपना स्टाल पंचायत भवन से हटाकर एक पूर्व उपसरपंच के निजी घर में लगाना पड़ा, जहां किसी तरह कामकाज शुरू किया गया।

इस पूरे मामले ने प्रशासनिक तैयारियों और पंचायत व्यवस्था की पोल खोल दी है। जब इस अव्यवस्था को लेकर पंचायत सचिव गोपाल यादव से सवाल किया गया, तो उन्होंने दावा किया कि पंचायत में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। हालांकि उनके इस दावे की सच्चाई तब सामने आ गई, जब अधिकारियों को खुद निजी घरों में जाकर काम करना पड़ा।

ग्रामीणों में इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। उनका कहना है कि यदि पंचायत में सभी सुविधाएं मौजूद थीं, तो शिविर को भवन से बाहर क्यों ले जाना पड़ा? ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत स्तर पर मिलने वाले फंड का सही उपयोग नहीं हो रहा है और केवल कागजों में ही व्यवस्थाएं दिखाकर लीपापोती की जा रही है।

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब यह आरोप सामने आया कि पंचायत की सरपंच सोनीय की जगह उनका बेटा कबिलेश सिंह ही अधिकतर कार्यभार संभालता है। ग्रामीणों का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण शिविर के दौरान भी न तो सरपंच उपस्थित रहीं और न ही उनके प्रतिनिधि। यहां तक कि जरूरत पड़ने पर फोन तक नहीं उठाया गया।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि शिविर से एक रात पहले ही बिजली का तार टूट गया था, लेकिन इसकी मरम्मत के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। यहां तक कि अस्थायी व्यवस्था के लिए एक जनरेटर तक उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे पूरा शिविर प्रभावित हुआ।

इस घटना ने ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे महत्वाकांक्षी अभियान पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जब ग्रामीण स्तर पर बिजली और इंटरनेट जैसी मूलभूत सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं हैं, तो डिजिटल सेवाओं की कल्पना कैसे की जा सकती है।

फिलहाल ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में भी ऐसे शिविर केवल औपचारिकता बनकर रह जाएंगे और आम जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिल पाएगा।