रंगीटोला चिचोला में शराब दुकान को लेकर हंगामा, सरपंच के फर्जी हस्ताक्षर का आरोप
ग्राम पंचायत रंगीटोला चिचोला में शराब दुकान खोलने को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। सरपंच ने अपने फर्जी हस्ताक्षर का आरोप लगाया है, वहीं ग्रामीणों और पंचों ने आबकारी विभाग और जमीन मालिक की मिलीभगत की आशंका जताई है।
UNITED NEWS OF ASIA. अभिषेक नामदेव, डोंगरगढ़ । रंगीटोला/चिचोला। ग्राम पंचायत रंगीटोला चिचोला में शराब दुकान (दारू भट्ठी) खोलने को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है, जिससे पूरे गांव में हड़कंप मच गया है। इस मामले में सरपंच के फर्जी हस्ताक्षर किए जाने का गंभीर आरोप लगा है, वहीं ग्राम पंचायत के पंचों और ग्रामीणों ने भी इस प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, गांव में शराब दुकान खोलने के लिए एक पत्र तैयार किया गया, जिस पर सरपंच और पंचों के हस्ताक्षर दिखाए गए हैं। लेकिन सरपंच ने स्पष्ट रूप से इन हस्ताक्षरों को फर्जी बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने ग्राम पंचायत की ओर से इस संबंध में कोई एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) जारी नहीं किया है।
सरपंच ने बताया कि जमीन मालिक योगेश सिन्हा उनके पास आए थे और शराब दुकान खोलने की बात कही थी। इस पर सरपंच ने उन्हें ग्राम सभा में प्रस्ताव रखने और सभी की सहमति लेने की सलाह दी थी। लेकिन आरोप है कि योगेश सिन्हा ने इस प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए अपने तरीके से दस्तावेज तैयार कर लिए और उस पर सरपंच व पंचों के फर्जी हस्ताक्षर करवा लिए।
ग्राम पंचायत के पंचों का कहना है कि उनसे घर-घर जाकर हस्ताक्षर कराए गए थे, लेकिन उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी कि यह हस्ताक्षर शराब दुकान खोलने के लिए उपयोग किए जाएंगे। बाद में जब उन्हें पूरे मामले की जानकारी मिली, तो उन्होंने भी इस पर आपत्ति जताई।
सरपंच ने यह भी आरोप लगाया है कि आबकारी विभाग और जमीन मालिक योगेश सिन्हा की मिलीभगत से यह पूरा मामला अंजाम दिया जा रहा है। उनका कहना है कि बिना ग्राम सभा की स्वीकृति और बिना विधिवत प्रक्रिया के किसी भी निजी जमीन पर शराब दुकान खोलना नियमों के खिलाफ है।
इस विवाद के सामने आने के बाद गांव में विरोध का माहौल बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में शराब दुकान खुलने से सामाजिक वातावरण प्रभावित होगा और युवाओं पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। कई ग्रामीणों ने इस निर्णय का खुलकर विरोध करते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, इस पूरे मामले ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि सरपंच और पंचों के हस्ताक्षर वास्तव में फर्जी हैं, तो यह एक गंभीर अपराध है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक शराब दुकान खोलने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासन की ओर से किसी आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस पूरे प्रकरण में कौन दोषी है और किसकी भूमिका कितनी रही है।