सुकमा में नक्सल मामलों में बंद आदिवासियों की रिहाई की मांग तेज, कांग्रेस ने परिवारों को दिया न्याय का भरोसा

सुकमा में नक्सल मामलों में जेल में बंद बताए जा रहे आदिवासियों की रिहाई की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हरीश कवासी ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। इस दौरान बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने भी फोन पर बातचीत कर कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से हर संभव प्रयास करने की बात कही।

Jul 18, 2026 - 16:48
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सुकमा में नक्सल मामलों में बंद आदिवासियों की रिहाई की मांग तेज, कांग्रेस ने परिवारों को दिया न्याय का भरोसा

UNITED NEWS OF ASIA. रीजेंट गिरी, सुकमा l सुकमा जिले में नक्सल मामलों में जेल में बंद बताए जा रहे आदिवासियों की रिहाई की मांग एक बार फिर चर्चा में है। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हरीश कवासी ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। कांग्रेस की इस पहल के बाद स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा फिर से प्रमुखता से उठने लगा है।

सुकमा में आयोजित मुलाकात के दौरान हरीश कवासी ने उन परिवारों से बातचीत की, जिनके परिजनों के बारे में उनका दावा है कि वे वर्षों से नक्सल मामलों में जेल में बंद हैं। परिवारों ने अपनी परेशानियां साझा करते हुए कहा कि लंबे समय से उनके स्वजन जेल में होने के कारण उन्हें आर्थिक, सामाजिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने निर्दोष लोगों की शीघ्र रिहाई की मांग भी उठाई।

मुलाकात के दौरान हरीश कवासी ने प्रभावित परिवारों की बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी से फोन पर भी बातचीत कराई। विधायक विक्रम मंडावी ने परिवारों को आश्वस्त करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति वास्तव में निर्दोष है और जेल में बंद है, तो उसकी रिहाई के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को सरकार और संबंधित मंचों पर प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रभावित परिवारों की मांगों को शासन और प्रशासन तक पहुंचाया जाएगा तथा न्याय दिलाने के लिए लगातार पहल की जाएगी। हरीश कवासी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी उन परिवारों के साथ खड़ी है, जो अपने परिजनों की रिहाई के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी हर स्तर पर उनकी आवाज उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।

कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया कि यदि किसी निर्दोष आदिवासी को नक्सल मामलों में जेल में रहना पड़ रहा है, तो उसे न्याय मिलना चाहिए। पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे को लोकतांत्रिक और कानूनी दायरे में उठाते हुए संबंधित अधिकारियों और सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से रखेगी।

हालांकि, इस मामले में यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि किन मामलों में संबंधित व्यक्ति दोषी या निर्दोष हैं, इसका अंतिम निर्णय न्यायालय और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही होता है। कांग्रेस नेताओं की ओर से यह बयान उनके राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण के रूप में सामने आया है।

फिलहाल, कांग्रेस की इस पहल के बाद प्रभावित परिवारों ने न्याय मिलने की उम्मीद जताई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन, सरकार और न्यायिक प्रक्रिया के तहत इस विषय में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और संबंधित मामलों में क्या प्रगति होती है।