सत्ता, संरक्षण और रेत का खेल? डोमा घाट में अवैध खनन पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक के डोमा पथरिया घाट में अवैध रेत खनन को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। रात में मशीनों से खनन और राजनीतिक संरक्षण के आरोपों ने मामले को तूल दे दिया है।

May 6, 2026 - 17:25
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सत्ता, संरक्षण और रेत का खेल? डोमा घाट में अवैध खनन पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

UNITED NEWS OF ASIA.  हेमंत पाल, दुर्ग। जिले के धमधा ब्लॉक के बोरी क्षेत्र स्थित डोमा पथरिया घाट में अवैध रेत खनन को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। शिवनाथ नदी के इस घाट पर देर रात भारी मशीनों से कथित तौर पर रेत उत्खनन किए जाने की खबर ने न सिर्फ प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि क्षेत्र की राजनीति भी गरमा गई है।

ग्रामीणों के अनुसार, रात के अंधेरे में चेन माउंटेन मशीनों के जरिए खुलेआम रेत निकाली जा रही थी। जब गांव के लोगों को इसकी जानकारी मिली, तो बड़ी संख्या में ग्रामीण घाट की ओर पहुंचे। ग्रामीणों को देखते ही मौके पर मौजूद कथित रेत कारोबारी मशीनें छोड़कर फरार हो गए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और लोगों में आक्रोश फैल गया।

सबसे गंभीर पहलू यह है कि ग्रामीणों ने इस मामले में राजनीतिक संरक्षण के आरोप लगाए हैं। कुछ ग्रामीणों ने साजा विधायक ईश्वर साहू और उनके करीबी सहयोगियों के नाम लेते हुए खनन गतिविधियों को संरक्षण देने की बात कही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। लंबे समय से शिवनाथ नदी के घाटों से कथित तौर पर अवैध रेत खनन जारी है, लेकिन खनिज विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब भारी मशीनें नदी घाट तक पहुंच रही थीं, तब संबंधित विभाग क्या कर रहे थे।

मामले में फर्जी माइनिंग परमिशन दिखाकर ग्रामीणों को डराने-धमकाने के आरोप भी सामने आए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि कुछ लोगों ने खनिज विभाग के नाम पर दस्तावेज दिखाकर अवैध खनन को वैध साबित करने की कोशिश की। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल अवैध खनन का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र को चुनौती देने जैसा गंभीर मामला बन सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या वास्तव में सत्ता के संरक्षण में नदी का दोहन किया जा रहा है, या फिर जिम्मेदार विभाग जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं। ग्रामीणों की आवाज अब केवल डोमा घाट तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जा सके।

अब सबकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह मामला और अधिक गंभीर रूप ले सकता है।