बलरामपुर में वन विभाग की बड़ी लापरवाही: दाल्को बांध के पास सागवान जंगलों की कटाई से मचा हड़कंप

बलरामपुर के रामानुजगंज वन परिक्षेत्र में दाल्को बांध के पास सागवान के जंगलों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। वन विभाग की लापरवाही से करोड़ों की पौधारोपण योजना पर संकट खड़ा हो गया है।

May 6, 2026 - 17:31
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बलरामपुर में वन विभाग की बड़ी लापरवाही: दाल्को बांध के पास सागवान जंगलों की कटाई से मचा हड़कंप

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर। जिले के रामानुजगंज वन परिक्षेत्र से वन विभाग की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां दाल्को बांध के पास स्थित सागवान के बेशकीमती जंगलों पर अवैध कटाई की जा रही है। इस घटना ने न केवल पर्यावरण संरक्षण की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत भी उजागर कर दी है।

जानकारी के अनुसार, पूरा मामला रामानुजगंज वन परिक्षेत्र के कंपार्टमेंट नंबर 3428 से जुड़ा है, जहां लाखों-करोड़ों रुपये की लागत से सागवान सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया था। लेकिन अब वही हरियाली उजड़ती नजर आ रही है। ग्रामीणों द्वारा पेड़ों की अंधाधुंध कटाई किए जाने की बात सामने आई है, जबकि वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके से नदारद बताए जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग की निष्क्रियता और कथित मिलीभगत के चलते ही यह स्थिति उत्पन्न हुई है। उनका कहना है कि जहां सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर उन पौधों और पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा रही है।

इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है, वही यदि अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करेंगे, तो पर्यावरण संरक्षण की योजनाएं कैसे सफल होंगी। “रक्षक ही भक्षक बन गए हैं” जैसी चर्चाएं अब स्थानीय स्तर पर आम हो गई हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, सागवान जैसे कीमती वृक्षों की कटाई न केवल आर्थिक नुकसान है, बल्कि यह पारिस्थितिकी संतुलन को भी प्रभावित करता है। इससे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट होता है और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव भी बढ़ सकते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में लंबे समय से वन विभाग की सक्रियता नजर नहीं आ रही है। नियमित गश्त और निगरानी के अभाव में अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिला है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही अवैध कटाई में शामिल लोगों पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी भी उतनी ही जरूरी है। यदि जिम्मेदार विभाग समय पर सक्रिय नहीं हुए, तो पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को गंभीर झटका लग सकता है।