राज्यसभा में गरमाया माहौल: जया बच्चन और सभापति के बीच तीखी नोकझोंक, बोलीं- “फांसी पर चढ़ा दीजिए”

राज्यसभा में ट्रांसजेंडर अधिकारों से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान जया बच्चन और सभापति के बीच तीखी बहस हो गई। व्यवधान और शोर-शराबे के बीच जया बच्चन का बयान चर्चा का विषय बन गया।

Mar 26, 2026 - 15:50
 0  3
राज्यसभा में गरमाया माहौल: जया बच्चन और सभापति के बीच तीखी नोकझोंक, बोलीं- “फांसी पर चढ़ा दीजिए”

UNITED NEWS OF ASIA.  राज्यसभा में एक बार फिर उस समय माहौल गरमा गया जब समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन और सभापति के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। यह पूरा घटनाक्रम ट्रांसजेंडर अधिकारों से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान सामने आया, जहां विपक्षी दल इस बिल का विरोध कर रहे थे और इसे समुदाय के हितों के खिलाफ बता रहे थे।

सदन की कार्यवाही के दौरान जैसे ही जया बच्चन बोलने के लिए खड़ी हुईं, उन्होंने सबसे पहले सभी सदस्यों को रामनवमी की शुभकामनाएं दीं। लेकिन उनके संबोधन के बीच में ही ट्रेजरी बेंच के कुछ सदस्य आपस में बातचीत करने लगे, जिससे उनका ध्यान भटक गया और उन्होंने बोलना रोक दिया। इस पर उन्होंने नाराजगी जाहिर की और कहा कि जब लोग बात कर रहे हैं, तो उनका ध्यान वहां चला जाता है, जिससे वे ठीक से अपनी बात नहीं रख पा रहीं।

इसी बीच, सदन की कार्यवाही का संचालन कर रहे डिप्टी चेयरमैन पैनल के सदस्य डॉ. दिनेश शर्मा ने जया बच्चन से कहा कि वे उनकी ओर देखकर अपनी बात रखें। इस पर जया बच्चन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर लोग ध्यान नहीं दे रहे हैं, तो उनकी बात का क्या मतलब है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब वे बोलेंगी, तो सभी का ध्यान उनकी ओर होना चाहिए।

स्थिति उस समय और ज्यादा तनावपूर्ण हो गई जब डॉ. शर्मा ने कहा कि सदन में कई लोग एक साथ बोलते हैं और उन्होंने अन्य सदस्यों से शांत रहने की अपील भी की। इस पर जया बच्चन ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “बच्चे बैठ जाओ”, जिससे सदन में हलचल और बढ़ गई।

इसके बाद डिप्टी चेयरमैन ने जया बच्चन को यह भी कहा कि उनका समय व्यर्थ हो रहा है। इस पर जया बच्चन ने व्यंग्यात्मक अंदाज में जवाब देते हुए कहा, “कोई बात नहीं सर, आप लोगों के हाथ में सबका समय है, जितना मर्जी दीजिए, फांसी पर चढ़ा दीजिए।” उनका यह बयान सदन में चर्चा का विषय बन गया और कुछ समय के लिए कार्यवाही और भी बाधित हो गई।

जया बच्चन ने आगे कहा कि अगर सदस्य उनकी बात नहीं सुन रहे हैं, तो उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए, क्योंकि सभापति की जिम्मेदारी है कि सदन में अनुशासन बनाए रखें। इस पर डॉ. दिनेश शर्मा ने जवाब दिया कि कभी इधर के सदस्य नहीं सुनते, तो कभी उधर के सदस्य नहीं सुनते। उन्होंने यह भी कहा कि सभी पक्षों को सदन की मर्यादा का पालन करना चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर संसद में अनुशासन और कार्यवाही के संचालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अक्सर देखा जाता है कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के दौरान शोर-शराबा और व्यवधान के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित होती है।

ट्रांसजेंडर अधिकारों से जुड़े इस विधेयक पर पहले से ही राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस बिल में समुदाय के हितों का पूरा ध्यान नहीं रखा गया है, जबकि सरकार का कहना है कि यह विधेयक ट्रांसजेंडर समुदाय को अधिकार और सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लाया गया है।

इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है और सोशल मीडिया पर भी जया बच्चन के बयान को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अब देखना होगा कि इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है और क्या सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चल पाती है या नहीं।