रायगढ़ रेलवे स्टेशन पर मासूम को बचाने में पुलिस की संवेदनशील पहल, डेढ़ माह के बच्चे को मिला नया सहारा

रायगढ़ रेलवे स्टेशन के बाहर एक महिला द्वारा डेढ़ माह के मासूम बच्चे के साथ मारपीट किए जाने की सूचना पर कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बच्चे को सुरक्षित बचाया। पुलिस ने न केवल बच्चे का उपचार कराया बल्कि बाल कल्याण समिति के माध्यम से उसकी सुरक्षा और संरक्षण की पूरी जिम्मेदारी निभाई। मामले में महिला की मानसिक स्थिति असामान्य पाई गई।

May 30, 2026 - 12:34
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रायगढ़ रेलवे स्टेशन पर मासूम को बचाने में पुलिस की संवेदनशील पहल, डेढ़ माह के बच्चे को मिला नया सहारा

UINTED NEWS OF ASIA. महेंद्र अग्रवाल, रायगढ़ l रायगढ़ रेलवे स्टेशन के बाहर एक डेढ़ माह के मासूम बच्चे के साथ हो रही बेरहमी की घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। समय रहते मिली सूचना और कोतवाली पुलिस की तत्परता के कारण बच्चे को न केवल सुरक्षित बचाया गया बल्कि उसके उपचार, संरक्षण और भविष्य की सुरक्षा की भी पूरी व्यवस्था की गई। यह मामला पुलिस की संवेदनशील कार्यशैली और मानवीय दृष्टिकोण का उदाहरण बनकर सामने आया है।

जानकारी के अनुसार 19 मई की शाम रायगढ़ रेलवे स्टेशन के बाहर मौजूद लोगों ने देखा कि एक महिला अपनी गोद में मौजूद छोटे बच्चे के साथ मारपीट कर रही है। बच्चे की लगातार रोने और चीखने की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोगों ने महिला को रोकने का प्रयास किया, लेकिन वह किसी की बात सुनने को तैयार नहीं हुई। स्थिति गंभीर होते देख लोगों ने तत्काल कोतवाली पुलिस को सूचना दी।

सूचना मिलते ही पुलिस पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंची। एएसआई गौतम ठाकुर, आरक्षक गणेश पैंकरा और अन्य पुलिसकर्मियों ने बच्चे को महिला के कब्जे से सुरक्षित बाहर निकाला और तत्काल संरक्षण में लिया। प्रारंभिक पूछताछ में महिला ने बच्चे को खरसिया से ट्रेन में लेकर आने की बात कही, लेकिन उसके व्यवहार और जवाबों से पुलिस को संदेह हुआ कि मामला सामान्य नहीं है।

पुलिस ने बच्चे को तुरंत उपचार के लिए केजीएच अस्पताल पहुंचाया। महिला आरक्षक अनिता बेक ने बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराने से लेकर उसकी देखभाल तक की जिम्मेदारी संभाली। प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे को मातृ एवं शिशु वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां उसकी निगरानी और इलाज किया गया।

उधर महिला से पूछताछ के दौरान उसके बयान लगातार बदलते रहे और वह असंगत बातें करती रही। पुलिस को उसकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं लगी, जिसके बाद उसे सखी सेंटर में सुरक्षित रखा गया। जांच के दौरान पुलिस ने महिला के परिवार का पता लगाया और उसके पति को बुलाकर पूछताछ की। पति ने बताया कि महिला मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही है और समय-समय पर उसकी स्थिति बिगड़ जाती है। उसने बच्चे को अपना पुत्र होने की पुष्टि भी की।

26 मई को बच्चे को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद महिला आरक्षक अनिता बेक ने उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया। समिति ने बच्चे के माता-पिता, दादी और नानी की उपस्थिति में विस्तृत काउंसलिंग की। मामले की समीक्षा के बाद बच्चे को अस्थायी रूप से उसके पिता के सुपुर्द किया गया। बाल कल्याण समिति ने आगे की निगरानी और आवश्यक प्रक्रियाओं के लिए परिवार को दोबारा बुलाया है।

पुलिस अधीक्षक Shashi Mohan Singh ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा समाज और परिवार दोनों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यदि कहीं किसी बच्चे के साथ हिंसा, उपेक्षा या दुर्व्यवहार होता दिखाई दे तो तत्काल पुलिस को सूचना दें।

इस पूरे घटनाक्रम में रायगढ़ कोतवाली पुलिस ने केवल कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी ही नहीं निभाई, बल्कि एक संवेदनशील संरक्षक की भूमिका निभाते हुए मासूम बच्चे को सुरक्षित जीवन की ओर लौटाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह कार्रवाई समाज में जागरूकता और पुलिस-जन सहयोग की मिसाल बनकर सामने आई है।