राज्योत्सव में पंडित विवेक शर्मा की मधुर गायिकी ने बांधा समां, छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत की गूंज में देर रात तक झूमते रहे दर्शक
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2025 के समापन समारोह में पंडित विवेक शर्मा की जसगीत और लोकगायन की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को देर रात तक मंत्रमुग्ध रखा। “मोर छत्तीसगढ़ महतारी” और “खोपा में डारे मोगरा” जैसे गीतों ने माहौल को भक्ति और लोक-संवेदना से भर दिया। स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों और पंथी नृत्य ने राज्योत्सव को सांस्कृतिक रंगमंच का अद्भुत अनुभव बना दिया।
UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2025 का समापन समारोह संगीत, संस्कृति और लोक परंपरा का अद्भुत संगम बन गया। जैसे-जैसे रात ढलती गई, वैसे-वैसे पीजी कॉलेज मैदान में छत्तीसगढ़ी लोकधुनों की गूंज बढ़ती गई। मंच पर जब प्रसिद्ध लोकगायक पंडित विवेक शर्मा ने अपनी मधुर आवाज़ में “मोर छत्तीसगढ़ महतारी तोला बार-बार प्रणाम हे” का गायन किया, तो पूरा पंडाल भक्ति और भावना के रस में डूब गया।
पंडित शर्मा की प्रस्तुति ने राज्योत्सव के वातावरण को ऊर्जा और भक्ति से भर दिया। “बैला के घाघर”, “मोला बेटा कहिके बुलाए वो” और “खोपा में डारे मोगरा” जैसे लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी गीतों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनके सुरों में छत्तीसगढ़ की माटी की सोंधी महक और लोकजीवन की आत्मा समाई हुई थी। हर गीत ने राज्य के लोकसंगीत की गहराई और समृद्ध परंपरा को उजागर किया।
कार्यक्रम में दृष्टि और श्रवण बाधित स्कूली बच्चों की प्रस्तुति ने दर्शकों के दिल को छू लिया। इन बच्चों ने अपनी कला के माध्यम से यह संदेश दिया कि सृजनशीलता की कोई सीमा नहीं होती। उनके प्रदर्शन ने पूरे पंडाल में भावनाओं का अद्भुत वातावरण बना दिया।
तीन दिवसीय राज्योत्सव के तीसरे दिन स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों ने भी खूब तालियां बटोरीं। रजऊ साहू के नेतृत्व में “गुर्तूर बोली गंवई दल” की प्रस्तुति “मन मोही डारे कोइली के ताल में” ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के मधुर रंग में भिगो दिया। कोइली के सुरों की गूंज से पूरा मंच जीवंत हो उठा।
भक्ति और लोकरंग का संगम तब देखने को मिला जब स्थानीय कलाकार गिरीश राजपूत ने जसगीतों की श्रृंखला प्रस्तुत की। “झूपत झूपत आबे दाई मोर अंगना वो” और “चंदवा बईगा” जैसे गीतों ने माहौल को भक्ति और श्रद्धा से भर दिया। राजपूत की गायकी में छत्तीसगढ़ की माटी की सुगंध और लोकभावनाओं की सादगी झलकती रही।
मंच पर पंथी नृत्य की ऊर्जावान प्रस्तुति ने समारोह को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। इस नृत्य ने छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत चित्र प्रस्तुत किया। कलाकारों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा, संगीत और नृत्य से राज्य की लोक आत्मा को साकार किया।
समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने उपस्थित होकर सभी कलाकारों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा उसके लोक कलाकारों में बसती है, जो अपनी कला के माध्यम से राज्य की पहचान को जीवंत रखते हैं। उपमुख्यमंत्री ने कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंटकर उनके योगदान की सराहना की और कहा कि “राज्योत्सव छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा, संगीत और नवाचार का अद्भुत संगम है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।”
राज्योत्सव के इस भव्य समापन ने न केवल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक एकता को मजबूती दी, बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया कि राज्य की लोकधुनें आज भी जन-जन के हृदय में धड़कती हैं।