पामेड़ अभयारण्य में अवैध फर्नीचर निर्माण पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई

बीजापुर जिले के पामेड़ अभयारण्य क्षेत्र अंतर्गत धरसावास में अवैध लकड़ी कटाई और फर्नीचर निर्माण के खिलाफ वन विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। छापेमारी के दौरान सागौन लकड़ी, मशीनें और अन्य सामग्री जब्त कर आरोपी के विरुद्ध वन अपराध दर्ज कर उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

Feb 1, 2026 - 10:52
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पामेड़ अभयारण्य में अवैध फर्नीचर निर्माण पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई

UNITED NEWS OF ASIA. पी. सतीश,बीजापुर छत्तीसगढ़। पामेड़ अभयारण्य क्षेत्र अंतर्गत धरसावास में अवैध रूप से लकड़ी कटाई कर फर्नीचर निर्माण किए जाने के मामले में वन विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध गतिविधियों का भंडाफोड़ किया है। यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई। धरसावास स्कूल के पीछे स्थित पुलिया के नीचे चल रहे अवैध फर्नीचर निर्माण स्थल पर वन अमले ने अचानक दबिश दी, जिससे मौके पर मौजूद लोग हड़बड़ा गए।

छापेमारी के दौरान पाया गया कि संरक्षित वन क्षेत्र से काटी गई सागौन लकड़ी का उपयोग कर मशीनों की सहायता से फर्नीचर तैयार किया जा रहा था। टीम ने मौके से कुल 3.652 घन मीटर सागौन लकड़ी, आरी मशीनें तथा फर्नीचर निर्माण में उपयोग होने वाली अन्य सामग्री जब्त की है। जब्त की गई सामग्री को विधिवत कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई प्रारंभ की गई।

वन विभाग द्वारा इस मामले में वन अपराध क्रमांक 22180/01 दर्ज किया गया है। कार्रवाई के दौरान पकड़े गए आरोपी को आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया के तहत न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि संरक्षित वन एवं अभयारण्य क्षेत्र में इस प्रकार की अवैध गतिविधियां वन संपदा और जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा हैं।

वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पामेड़ अभयारण्य जैसे संवेदनशील और संरक्षित क्षेत्रों में अवैध कटाई, लकड़ी परिवहन और फर्नीचर निर्माण जैसे कार्यों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी इस तरह की गतिविधियों के विरुद्ध सघन निगरानी रखी जाएगी तथा संयुक्त टीमों के माध्यम से निरंतर कार्रवाई की जाएगी।

विभागीय अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं पर अवैध लकड़ी कटाई, परिवहन या फर्नीचर निर्माण जैसी गतिविधियों की जानकारी मिले तो तत्काल वन विभाग को सूचित करें, ताकि समय रहते वन संपदा को नुकसान से बचाया जा सके।