कोंडागांव में एक दूल्हा-दो दुल्हन विवाह पर विवाद, सर्व आदिवासी समाज ने जताई कड़ी आपत्ति
कोंडागांव के बैलगांव में एक दूल्हे द्वारा दो दुल्हनों से एक साथ विवाह करने का मामला सामने आने के बाद सर्व आदिवासी समाज ने प्रेसवार्ता कर इस पर कड़ी आपत्ति जताई और जांच की मांग की।
UNITED NEWS OF ASIA. रामकुमार भारद्वाज, कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में एक अनोखी शादी का मामला सामने आने के बाद सामाजिक विवाद गहराता जा रहा है। ग्राम बैलगांव में एक दूल्हे द्वारा दो दुल्हनों से एक साथ फेरे लेकर विवाह करने की घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसके बाद इस पर व्यापक प्रतिक्रिया सामने आ रही है।
इस मामले को लेकर फरसगांव में सर्व आदिवासी समाज ने प्रेसवार्ता आयोजित कर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की। समाज के पदाधिकारियों ने इस तरह के विवाह को सामाजिक परंपराओं और मान्यताओं के खिलाफ बताया और इसे गलत ठहराया।
प्रेसवार्ता के दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि इस प्रकार की घटनाएं समाज में गलत संदेश देती हैं और सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की जांच की जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
सर्व आदिवासी समाज के ब्लॉक अध्यक्ष ईश्वर कोर्राम ने कहा कि आदिवासी समाज में विवाह की अपनी परंपराएं और नियम होते हैं, जिनका पालन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं समाज की मर्यादा और परंपराओं के विपरीत हैं।
इस अवसर पर अखिल भारतीय हलबा समाज 32 गढ़ महासभा के अध्यक्ष वीरेन्द्र चनाप, सर्व आदिवासी समाज जिला कोंडागांव के उपाध्यक्ष शिव कुमार पात्र, गोंडवाना समाज ब्लॉक शाखा फरसगांव के अध्यक्ष छेरकुराम नेताम और पूर्व सचिव सुकलाल मरकाम सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
समाज के प्रतिनिधियों ने युवाओं से भी अपील की कि वे बिना सोचे-समझे इस प्रकार के कदम न उठाएं और समाज की परंपराओं एवं मर्यादाओं का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में भी सामाजिक मूल्यों को बनाए रखना बेहद जरूरी है।
इस घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है। जहां कुछ लोग इसे व्यक्तिगत निर्णय मान रहे हैं, वहीं समाज के बड़े वर्ग ने इसे परंपराओं के खिलाफ बताते हुए विरोध जताया है।
प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन समाज की मांग के बाद जांच की संभावना बढ़ गई है।
कुल मिलाकर, कोंडागांव की यह घटना केवल एक शादी तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सामाजिक मूल्यों, परंपराओं और आधुनिक सोच के बीच टकराव का विषय बन गई है। आने वाले समय में प्रशासन के कदम और समाज की प्रतिक्रिया इस मामले की दिशा तय करेंगे।