नेरली गांव में आधार न बनने से दिव्यांग परेशान, योजनाओं के लाभ से वंचित
दंतेवाड़ा जिले के नेरली गांव के दिव्यांग ग्रामीण रामू भास्कर का आधार कार्ड तकनीकी कारणों से नहीं बन पा रहा है। दिव्यांगता प्रमाण पत्र होने के बावजूद आधार न बनने से वह पेंशन, राशन और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित है। ग्रामीणों ने प्रशासन से विशेष श्रेणी के तहत आधार बनवाने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. नवीन चौधरी, दंतेवाड़ा l दंतेवाड़ा जिले के नेरली गांव में एक दिव्यांग ग्रामीण के आधार कार्ड नहीं बन पाने का मामला सामने आया है। आधार कार्ड न बनने के कारण वह विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित है। प्रभावित ग्रामीण रामू भास्कर कई बार आधार पंजीयन केंद्र पहुंच चुका है, लेकिन हर बार उसे तकनीकी समस्याओं का हवाला देकर वापस भेज दिया जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार रामू भास्कर की आंखों की स्थिति सामान्य नहीं है, जिससे आधार पंजीकरण के दौरान आवश्यक बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। आधार बनाने के लिए फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन जरूरी होते हैं, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण इन प्रक्रियाओं में कठिनाई आ रही है। यही वजह है कि अब तक उसका आधार पंजीकरण सफल नहीं हो सका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रामू भास्कर के पास वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र मौजूद है। इसके बावजूद आधार कार्ड नहीं बनने से उसे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। राशन, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार की आवश्यकता होने के कारण वह लंबे समय से परेशान है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा हर बार “सिस्टम एरर” का हवाला देकर मामला टाल दिया जाता है। कई बार प्रयास करने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। इससे न केवल रामू भास्कर बल्कि गांव के अन्य लोगों में भी प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नाराजगी दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की योजनाएं जरूरतमंदों तक पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं के कारण कई पात्र लोग लाभ से वंचित रह जाते हैं। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के पास सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं, तो उसे केवल तकनीकी कारणों से योजनाओं से दूर नहीं रखा जाना चाहिए।
विशेषज्ञों और सरकारी नियमों के अनुसार, जिन लोगों का बायोमेट्रिक सत्यापन संभव नहीं हो पाता, उनके लिए “बायोमेट्रिक एक्सेप्शन” की व्यवस्था उपलब्ध है। इस प्रावधान के तहत फोटो और अन्य पहचान दस्तावेजों के आधार पर भी आधार संख्या जारी की जा सकती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी नागरिक को तकनीकी कारणों से पहचान और सरकारी सुविधाओं से वंचित न होना पड़े।
हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि इस व्यवस्था का लाभ उन्हें व्यवहारिक रूप से नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि यदि नियम मौजूद हैं तो उनका पालन भी प्रभावी तरीके से होना चाहिए।
नेरली गांव के लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कर विशेष श्रेणी के तहत रामू भास्कर का आधार कार्ड बनवाया जाए। ग्रामीणों का मानना है कि इससे न केवल एक जरूरतमंद व्यक्ति को राहत मिलेगी बल्कि प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।
यह मामला डिजिटल पहचान प्रणाली और सरकारी सेवाओं की पहुंच को लेकर कई सवाल खड़े करता है। साथ ही यह बताता है कि योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर संवेदनशील और प्रभावी कार्यवाही की आवश्यकता है।